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शिआनरेनझांग चा
Xiānrénzhǎng chá · 仙人掌茶
शिआनरेनझांग चा (仙人掌茶, xiānrénzhǎng chá — «अमर की हथेली वाली चाय») इतिहास की एकमात्र चाय है जिसका नाम स्वयं महान कवि ली बाई (李白, Lǐ Bái, 701–762) ने रखा। 760 ई. में बौद्ध भिक्षु झोंगफू (中孚禅师, Zhōngfú Chánshī) — जो ली कुल के ली बाई के भतीजे थे — ने हुबेई प्रांत के युचुआनसी (玉泉寺, «हरिताश्म स्रोत») बौद्ध मंदिर में यह चाय…
शिआनरेनझांग चा (仙人掌茶, xiānrénzhǎng chá — «अमर की हथेली वाली चाय») इतिहास की एकमात्र चाय है जिसका नाम स्वयं महान कवि ली बाई (李白, Lǐ Bái, 701–762) ने रखा। 760 ई. में बौद्ध भिक्षु झोंगफू (中孚禅师, Zhōngfú Chánshī) — जो ली कुल के ली बाई के भतीजे थे — ने हुबेई प्रांत के युचुआनसी (玉泉寺, «हरिताश्म स्रोत») बौद्ध मंदिर में यह चाय निर्मित की। नानजिंग में चखने के बाद ली बाई ने इसे अमर की हथेली नाम देकर अमर कर दिया, क्योंकि इसका चपटा रूप खुली हथेली जैसा दिखता था। यह चीन की उन विरल हरी चायों में से एक है जो भाप-प्रक्रमण (蒸青, zhēngqīng) तकनीक से बनती है — तांग काल की पैतृक विधि, जिसे चीन के अधिकांश भागों में कड़ाही-भूनने की विधि ने विस्थापित कर दिया है।
1. वर्गीकरण एवं उत्पत्ति:
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प्रकार: हरी चाय (अकिण्वित)। भाप-प्रक्रमित हरी चाय (蒸青绿茶, zhēngqīng lǜchá) — एंज़ाइम निष्क्रियता भाप द्वारा होती है, कड़ाही-भूनने से नहीं। आकार में चपटी, «हथेलीरूपी» (掌形, zhǎngxíng)।
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श्रेणी: राष्ट्रीय भौगोलिक संकेत संरक्षित उत्पाद (国家地理标志保护产品, 2015)। 2014 में इसकी उत्पादन तकनीक राष्ट्रीय स्तरीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची (国家级非物质文化遗产) में सम्मिलित। 1985 में हुबेई प्रांत का «स्वर्ण प्याला» पुरस्कार (湖北省”金杯奖”)। मिंग और चिंग वंशों की ऐतिहासिक «गोंगचा» (贡茶)।
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उत्पत्ति: चीन, हुबेई प्रांत (湖北, Húběi), दांगयांग शहर (当阳市, Dāngyáng Shì)। भौगोलिक संकेत क्षेत्र — सम्पूर्ण दांगयांग नगर परिषद्। टेरोआर का केन्द्र — युचुआनशान पर्वत (玉泉山, Yùquán Shān) का दक्षिणी ढाल, युचुआनसी बौद्ध मंदिर का परिसर तथा समीपवर्ती गाँव (玉泉村, 百宝寨村), जो प्रसिद्ध मोती स्रोत (珍珠泉, Zhēnzhū Quán) के अत्यन्त निकट हैं।
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भौगोलिक निर्देशांक: 111°59′07″—112°09′22″ पूर्व देशान्तर, 31°14′06″—31°34′53″ उत्तरी अक्षांश।
2. इतिहास एवं सांस्कृतिक महत्त्व:
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इतिहास: लगभग 760 ई. (शांगयुआन काल, 上元, तांग राजवंश) में बौद्ध भिक्षु झोंगफू (中孚禅师), जो ली (李) कुल — कवि ली बाई के ही कुल — से थे, ने युचुआनसी मंदिर के दुग्ध-गुफा (乳窟洞, Rǔkū Dòng) के पास उगी चाय की झाड़ियों से ताज़ा पत्तियाँ तोड़ीं और एक असामान्य चपटी चाय बनाई जिसका आकार खुली हथेली सा था।
झोंगफू इस चाय को नानजिंग (金陵, Jīnlíng) लाए और अपने प्रसिद्ध बन्धु — महाकवि ली बाई (李白) को भेंट किया। ली बाई ने चाय चखी, इसके आकार और स्वाद से मुग्ध हो गए और व्यक्तिगत रूप से इसे «शिआनरेनझांग» (仙人掌, «अमर की हथेली») नाम दिया — इसका चपटा रूप, जो किसी दाओवादी अमर की खुली हथेली जैसा लगता था। इसके अतिरिक्त, ली बाई ने इस चाय पर एक कविता लिखी — «भिक्षु-भतीजे झोंगफू द्वारा भेंट ‘अमर की हथेली’ चाय के उपलक्ष्य में उपहार-सहित कविता» (答族侄僧中孚赠玉泉仙人掌茶序)। चीनी साहित्य में यह आरम्भिक एवं अत्यन्त प्रसिद्ध चाय-कविताओं में से एक है। इसी क्षण से चाय को नाम और साहित्यिक अमरता प्राप्त हो गई।
मिंग और चिंग वंशों में शिआनरेनझांग चा राजशाही भेंट (贡茶) की सूची में सम्मिलित हुई। महान् औषधिशास्त्री ली शिझेन (李时珍, Lǐ Shízhēn) ने «बेंकाओ गांगमु» (本草纲目) में दर्ज किया: «चू राज्य की चायों में, जिंगझोऊ का ‘अमर की हथेली’ है» (楚之茶,则有荆州之仙人掌)।
20वीं शती में: दशकों के ह्रास के पश्चात् उत्पादन 1981 में पुनर्जीवित किया गया। 1985 में प्रांतीय पुरस्कार। 2014 में तकनीक राष्ट्रीय स्तरीय अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल। 2015 में भौगोलिक संकेत संरक्षण।
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नाम:
- «शिआनरेन» (仙人) — «अमर, देवपुरुष»: अमरत्व प्राप्त दाओवादी प्राणी की छवि।
- «झांग» (掌) — «हथेली»: चाय की पत्ती के चपटे रूप का द्योतक, जो खुली हथेली-सा हो।
- नाम स्वयं ली बाई — चीनी इतिहास के सर्वश्रेष्ठ कवि — द्वारा दिया गया। इतने महान् कवि से किसी चाय का नामकरण होने का यह एकमात्र ज्ञात प्रसंग है।
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सांस्कृतिक महत्त्व: शिआनरेनझांग चा एक ऐसी चाय है जिसके पास अद्वितीय «साहित्यिक पासपोर्ट» है: ली बाई की कविता ने इसे मठीय पेय से वैश्विक स्तर की सांस्कृतिक कलाकृति में बदल दिया। युचुआनसी मंदिर — चीन के प्राचीनतम बौद्ध मंदिरों में से एक (593 ई. में स्थापित), और इसका मोती स्रोत — प्रसिद्ध प्राकृतिक दर्शनीय स्थल है। भाप-प्रक्रमण तकनीक (蒸青) — तांग युग का «सजीव जीवाश्म»: ली बाई और लू यू के काल में यही विधि प्रयुक्त होती थी, और बाद में यह जापान पहुँचकर सेन्चा और ग्योकुरो के उत्पादन का आधार बनी।
3. वानस्पतिक विवरण एवं कच्चा माल:
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किस्म / कृषिजोपक: युचुआनशान च्युन्तिझोंग (玉泉山群体种) — स्थानीय देशी मध्यम-पर्णी Camellia sinensis var. sinensis झाड़ीनुमा प्रकार। पत्ती — दीर्घवृत्ताकार, मांसल। सक्रिय कायिक अवधि — मार्च से सितम्बर तक। प्रतिकूल परिस्थितियों के प्रति उच्च सहनशीलता। मृदा से सेलेनियम अवशोषित करने की उन्नत क्षमता (硒吸收率较高)।
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तुड़ाई: वसन्त — मुख्य। उच्चतम श्रेणी (特级) के लिए — एक कली-एक पत्ती, «कली पत्ती से लम्बी» (芽长于叶)। रोमिलता — प्रचुर, सफ़ेद। प्रथम श्रेणी के लिए — एक कली, एक-दो पत्तियाँ। द्वितीय श्रेणी के लिए — एक कली, दो-तीन पत्तियाँ।
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कच्चे माल की आवश्यकताएँ: कोमल, एकसमान प्ररोह, जिनमें बैंगनी पत्तियाँ न हों, कीट या रोगक्षति न हो। प्रसंस्करण — तुड़ाई वाले दिन ही।
4. टेरोआर एवं उत्पादन विशिष्टताएँ:
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जलवायु: उपोष्णकटिबंधीय आर्द्र मानसूनी। मध्य-वार्षिक तापमान — 16.4°C, वार्षिक वर्षा — 1250 मिमी, सापेक्ष आर्द्रता — ≥78%।
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उत्पादन ऊँचाई: समुद्र तल से 400–800 मीटर। केन्द्र — युचुआनशान पर्वत का दक्षिणी ढाल।
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मृदा: पीली-भूरी (黄棕壤) एवं लाल बलुई (红砂岩风化沙质土), pH 4.5–6.5। कार्बनिक पदार्थ सामग्री — ≥1.5%।
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अनूठी विशेषताएँ: पर्वतीय उपत्यकाएँ सतत मेघ एवं कुहरे से आच्छादित। अनेक भूमिगत स्रोत, जिनमें प्रसिद्ध मोती स्रोत (珍珠泉) भी है — स्वच्छ जल, खनिज-समृद्ध। वनावरण — 70%, वृक्षों की 300 से अधिक प्रजातियाँ (तेजपत्ता और कमल सहित) एक अद्वितीय «उच्च-पर्वतीय मेघ वन» (高山云雾) पारितंत्र का निर्माण करती हैं।
5. उत्पादन तकनीक:
शिआनरेनझांग चा उन कुछ आधुनिक चीनी हरी चायों में से है जो भापीय स्थिरीकरण (蒸青, zhēngqīng) का प्रयोग करती हैं — एक ऐसी विधि जिसमें पत्तियों को कड़ाही में भूनने के बजाय गरम भाप से उपचारित किया जाता है। यह तकनीक तांग युग की, ली बाई और लू यू के समय की प्रत्यक्ष विरासत है।
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भापीय स्थिरीकरण (蒸汽杀青 — zhēngqì shāqīng): 100°C पर, अवधि — 50–60 सेकण्ड। भाप क्षणिक रूप से एंज़ाइमों को निष्क्रिय कर अधिकतम चटक हरा रंग संरक्षित करती है (锁鲜保”三绿”) — «तीन हरित»: हरा शुष्क पर्ण, हरा आसव, हरा पर्णावशेष। भाप-प्रयोग ही «तीन हरित» देता है — एक ऐसा गुण जो भूनकर स्थिरीकरण में अप्राप्य है।
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वात-शीतलन (扇凉 — shànliáng): स्थिरीकरण के पश्चात् पत्तियाँ वायु-धारा से शीघ्र ठंडी की जाती हैं।
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भूनना एवं आकार देना (炒青做形 — chǎoqīng zuòxíng): तीन चरण:
- प्रथम भूनाई (头青): «झटकारना और बिखेरना» (抖散, dǒusàn) — चिपकी पत्तियों को पृथक करना।
- द्वितीय भूनाई (二青): «झटकने» और «धीमी आँच पर रखने» (抖闷结合) का क्रम — सुगंध विकसित करना।
- आकार-निर्माण (做形): प्रमुख तकनीक — «पकड़ना और दबाना» (抓按, zhuā àn) — दक्ष कारीगर पत्तियों को पकड़कर कड़ाही की दीवार पर दबाता है, जिससे विशिष्ट चपटी «हथेलीरूपी» (掌形, zhǎngxíng) आकृति बनती है। सम्पूर्ण प्रक्रिया हस्त-कृत होती है, जिसमें पत्ती को लाल होने से रोकने के लिए तापमान का सटीक नियंत्रण होता है।
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शोषण एवं आकार-पुष्टि (烘干定型 — hōnggān dìngxíng): 70°C पर, नमी की मात्रा ≤5% तक।
6. इंद्रिय-ग्राह्य गुण:
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शुष्क पर्ण का बाह्य रूप: विशिष्ट «हथेलीरूपी» (掌形, zhǎngxíng — खुली हथेली का आकार) चपटी, सीधी, समान पत्तियाँ। रंग — उज्ज्वल मरकतमणि-हरित (翠绿). प्रचुर रजतिल रोम (显毫). «तीन हरित» (三绿, sān lǜ): हरा शुष्क पर्ण, हरा आसव, हरा पर्णावशेष — भाप-प्रक्रमण तकनीक का ट्रेडमार्क।
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शुष्क पर्ण की सुगंध: स्वच्छ, ललित (清香雅淡, qīngxiāng yǎdàn). हल्की «सौर» टोन (日晒气, rìshài qì) — भाप-प्रक्रमित हरी चायों का सूक्ष्म ओवरटोन।
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आसव की सुगंध: स्वच्छ, स्थायी, कोमल हरी ताज़गी सहित। कोई «भुनी» टोन नहीं — स्थिरीकरण भाप से होने का फल।
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स्वाद: ताज़ा एवं रसीला (鲜爽, xiānshuǎng), मधुर (甘, gān), घना (醇厚, chúnhòu), सुस्पष्ट प्रत्यागत मिठास (回甘, huígān) सहित। कषायता न्यूनतम। स्वाद भूनकर स्थिर चायों की अपेक्षा अधिक «हरा» एवं «शुद्ध» है — इसमें «潮青» के विशिष्ट चेस्टनट-नटीय टोन नहीं हैं।
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आसव का रंग: सुकोमल हरा, चमकदार एवं पारदर्शी (嫩绿明亮) — भाप से क्लोरोफ़िल के अधिकतम संरक्षण के कारण भूनकर स्थिर चायों से अधिक गाढ़ा हरा।
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पर्णावशेष: उज्ज्वल हरे रंग के कोमल, एकसमान प्ररोह — «तीन हरित» में से तृतीय।
7. रासायनिक संघटन:
भाप-प्रक्रम तकनीक (蒸青) ताज़ी पत्ती की मूल रासायनिक प्रोफ़ाइल को अधिकतम बनाए रखती है:
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पॉलीफ़िनॉल (केटेचिन): महत्वपूर्ण मात्रा में। भाप केटेचिन को भूनने की अपेक्षा कम ऑक्सीकृत रूप में संरक्षित करती है।
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अमीनो-अम्ल (L-थीनिन सहित): उन्नत मात्रा — 100°C पर भापीय स्थिरीकरण ताप-संवेदी अमीनो-अम्लों के प्रति 140–200°C की भूनाई से अधिक कोमल है।
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क्लोरोफ़िल: पर्याप्त रूप से उन्नत मात्रा — भाप हरे वर्णक का अधिकतम संरक्षण करती है। यही क्लोरोफ़िल आसव का गहरा हरा रंग निर्धारित करता है।
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फ़्लेवोनॉइड (黄酮类, huángtóng lèi): उन्नत मात्रा। शोध आँकड़ों के अनुसार, शिआनरेनझांग चा फ़्लू विषाणुओं और स्ट्रेप्टोकोक्की के विरुद्ध सार्थक सक्रियता रखता है — यह प्रभाव फ़्लेवोनॉइड और क्लोरोजेनिक अम्ल (绿原酸, lǜyuánsuān) से जुड़ा है।
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क्लोरोजेनिक अम्ल (绿原酸): उन्नत मात्रा — प्रदाहरोधी एवं प्रतिऑक्सीकारक घटक।
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क्षाराभ: कैफ़ीन — मध्यम मात्रा।
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विटामिन: विटामिन C (कोमल भापीय स्थिरीकरण के कारण अधिकतम संरक्षित)।
8. लाभकारी गुण:
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शीतलन एवं निराविषीकरण प्रभाव (清热解毒): भाप-प्रक्रमित हरी चाय के पारम्परिक गुण।
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स्वासनली-विस्तारक प्रभाव (止嗽平喘): पारम्परिक चिकित्सा इस चाय को कास एवं श्वासकष्ट दूर करने की क्षमता वाला मानती है।
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प्रतिऑक्सीकारक क्रिया: पॉलीफ़िनॉल + फ़्लेवोनॉइड + क्लोरोजेनिक अम्ल — त्रिगुण प्रतिऑक्सीकारक सम्मिश्र।
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शर्करा एवं लिपिड स्तर का नियंत्रण (降血糖血脂): पॉलीफ़िनॉल और क्लोरोजेनिक अम्ल।
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प्रतिविषाणु क्रिया: फ़्लेवोनॉइड और क्लोरोजेनिक अम्ल फ़्लू विषाणुओं तथा स्ट्रेप्टोकोक्की को सार्थक रूप से दबाते हैं।
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महत्वपूर्ण: उल्लिखित गुण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आँकड़ों पर आधारित हैं और चिकित्सीय परामर्श नहीं हैं।
9. पानी में डालना (बिअरिंग):
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जल का तापमान: 85–90°C.
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चाय की मात्रा: 3 ग्राम प्रति 150 मिली जल (अनुपात 1:50).
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पात्र: काँच का गिलास या श्वेत चीनी मिट्टी की गाइवान।
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प्रक्रिया:
- पात्र गरम करें, जल फेंक दें।
- चाय डालें।
- पात्र का 1/3 भाग जल डालें, चाय को 30 सेकण्ड «भिगोएँ»।
- 7/10 भाग तक जल और डालें। प्रथम आसवण — 20 सेकण्ड।
- आगामी आसवण — 10 सेकण्ड बढ़ाएँ। चाय 3 बार पानी में डाली जा सकती है।
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टिप्पणी: ताज़ी खरीदी चाय को «अग्नि-स्वाद के विलोप» हेतु ~2 सप्ताह रखने की अनुशंसा है। चाय का मूल्यांकन करते समय फफूँद की अनुपस्थिति पर ध्यान दें — प्राकृतिक सफ़ेद रोम (白毫) को फफूँदी लेप (霉斑) से भिन्न पहचानें।
10. भंडारण:
- वायुरोधी, अँधेरे, शुष्क एवं शीतल स्थान पर, बाहरी गंधों से दूर रखें।
- सर्वोत्तम — 0–5°C पर प्रशीतित्र में।
- भंडारण अवधि — 12 मास तक।
- खोलने के पश्चात — 1–2 मास भीतर उपयोग करें।
11. मूल्य एवं नकल:
शिआनरेनझांग चा — सीमित उत्पादन वाली चाय: केन्द्र — युचुआनसी मंदिर का परिसर एवं समीपवर्ती गाँव। तीन श्रेणियाँ (特级, 一级, 二级)।
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नकल से बचने के उपाय:
- प्रमाणित विक्रेताओं से क्रय करें जिनके पास दांगयांग शहर का भौगोलिक संकेत अंकन हो।
- आकार का मूल्यांकन करें: विशिष्ट चपटी «हथेली» — अद्वितीय आकृति, जो अन्य चायों में नहीं मिलती। लिपटी हुई या सुई-जैसी पत्तियाँ — भिन्न प्रकार की चाय हैं।
- «तीन हरित» की जाँच करें: हरा पर्ण, हरा आसव, हरा पर्णावशेष। आसव का पीलापन भाप-प्रक्रमित न होकर भूनकर बनी चाय का संकेत है।
- सुगंध का मूल्यांकन करें: स्वच्छ, कोमल, बिना «भुनी» टोन के। चेस्टनट या सेम-जैसी सुगंध — भिन्न तकनीक का प्रकार है।
- मूल्य पर ध्यान दें: संदिग्ध रूप से कम मूल्य — नकल का संकेत।
12. रोचक तथ्य:
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ली बाई द्वारा व्यक्तिगत रूप से नामित एकमात्र चाय — तांग राजवंश के सर्वश्रेष्ठ कवि, चीनी काव्य के «दो सन्तों» में से एक (दू फू के साथ)। ली बाई की कविता «答族侄僧中孚赠玉泉仙人掌茶序» — विश्व साहित्य के आरम्भिक एवं अत्यन्त प्रसिद्ध चाय-सृजनों में से एक।
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भिक्षु झोंगफू (中孚禅师) — केवल बौद्ध उपदेशक नहीं, अपितु ली कुल के ली बाई के रिश्तेदार (族侄, «कुल-भतीजा») भी थे। इस प्रकार, चाय की कथा आठवीं शती के चीनी अभिजात्य वर्ग में पारिवारिक सम्बन्धों की भी कथा है।
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भाप-प्रक्रम तकनीक (蒸青) — तांग युग का «सजीव जीवाश्म»। ली बाई और लू यू के काल में यही विधि प्रयुक्त होती थी। जापान में यह 12वीं–13वीं शताब्दी में पहुँची और सेन्चा, ग्योकुरो तथा माचा के उत्पादन का आधार बनी। स्वयं चीन में भूनना (炒青) ने भाप-प्रयोग को लगभग सर्वत्र विस्थापित कर दिया — किन्तु शिआनरेनझांग चा ने प्राचीन विधि संरक्षित रखी।
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ली शिझेन — सर्वोत्तम औषधीय ग्रंथ «बेंकाओ गांगमु» के रचयिता — ने शिआनरेनझांग चा को विशेष रूप से «चू राज्य की चाय» (楚之茶) के रूप में उल्लेखित किया।
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युचुआनसी मंदिर — चीन के प्राचीनतम बौद्ध मंदिरों में से एक (593 ई. में स्थापित), और इसका मोती स्रोत (珍珠泉) — प्राकृतिक दर्शनीय स्थल, जहाँ भूमि से बुदबुदे उठते हैं जो मोतियों-जैसे दीखते हैं।
13. अन्य भाप-प्रक्रमित (蒸青) एवं «नामधारी» हरी चायों से तुलना:
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एन्शी यू लू (恩施玉露): हुबेई से। यह भी भाप-प्रक्रमित (蒸青), यह भी हुबेई की। यू लू — सुई-आकार वाली, «जापानी» चरित्र सहित; शिआनरेनझांग — चपटी, «हथेलीरूपी», तांग युग की आभा लिए।
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जापानी सेन्चा (煎茶, Sencha): भी भाप-प्रक्रमित (蒸し製)। किन्तु सेन्चा — अधिक «समुद्री» एवं «उमामी»-उन्मुख; शिआनरेनझांग — अधिक «शुद्ध» एवं कोमल, «सौर» टोन सहित।
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नानजिंग यू हुआ चा (南京雨花茶): नानजिंग से — वही शहर जहाँ ली बाई ने चाय को नाम दिया। यू हुआ चा — भूनकर बनी, सुई-आकार; शिआनरेनझांग — भाप-प्रक्रमित, चपटी। भिन्न तकनीकें, किन्तु — साझा नानजिंग-संबंध।
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लोंग जिंग (龙井): भी चपटी, किन्तु — भूनकर (炒青), सुस्पष्ट सेम-चेस्टनट सुगंध सहित। लोंग जिंग — «संरचनात्मक» और «उमामी»; शिआनरेनझांग — अधिक «शुद्ध», बिना भुनी टोन के, भाप-प्रक्रम प्रकार की «तीन हरित» सहित।
निष्कर्षतः:
शिआनरेनझांग चा — वह चाय जिसे चीन के महानतम कवि ने अमरता प्रदान की। 760 ई. में जब ली बाई ने अपने भिक्षु-भतीजे के हाथों से दाओवादी अमर की हथेली-सी दिखने वाली चपटी हरी पत्ती ग्रहण की, तब उन्होंने उसे मात्र नाम ही नहीं दिया — उन्होंने चाय को चीनी काव्य के देवकुल में अंकित कर दिया। बारह शताब्दियों पश्चात् «अमर की हथेली» आज भी युचुआन पर्वत के उसी ढाल पर, उसी मोती स्रोत के समीप, उसी भाप-प्रक्रम तकनीक से उत्पादित होती है जो «चाय सिद्धांत»-काल में प्रयुक्त होती थी। इसकी «तीन हरित» — हरा पर्ण, हरा आसव, हरा पर्णावशेष — केवल दृश्य विशेषता नहीं, अपितु तांग युग से स्पर्शगम्य सम्बद्धता है: उस समय से, जब चाय को भुना नहीं, भाप दिया जाता था, जब कवि चायों को नाम देते थे और भिक्षु उन्हें निर्मित करते थे। उनके लिए जो केवल एक पेय नहीं, बल्कि सहस्र वर्षों के इतिहास का स्पर्श खोजते हैं — शिआनरेनझांग चा, अमर की हथेली की चाय, अपने हरिताश्म प्याले में प्रतीक्षा करती है।
14. अन्य भाप-संसाधित (蒸青) एवं «प्रसिद्ध» हरी चायों से तुलना:
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एन्शी यू लू (恩施玉露): हुबेई से। भाप-संसाधित (蒸青), हुबेई से। यू लू — सुई-आकार वाली, «जापानी» चरित्र सहित; शिआनरेनझांग — चपटी, «हथेलीरूपी», तांग युग की आभा लिए।
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जापानी सेन्चा (煎茶, Sencha): भी भाप-संसाधित (蒸し製)। किन्तु सेन्चा — अधिक «समुद्री» एवं «उमामी»-उन्मुख; शिआनरेनझांग — अधिक «शुद्ध» एवं कोमल, «सौर» टोन सहित।
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नानजिंग यू हुआ चा (南京雨花茶): नानजिंग से — वही शहर जहाँ ली बाई ने चाय को नाम दिया। यू हुआ चा — भूनकर बनी, सुई-आकार; शिआनरेनझांग — भाप-संसाधित, चपटी। भिन्न तकनीकें, किन्तु — साझा नानजिंग-संबंध।
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लोंग जिंग (龙井): भी चपटी, किन्तु — भूनकर (炒青), सुस्पष्ट सेम-चेस्टनट सुगंध सहित। लोंग जिंग — «संरचनात्मक» और «उमामी»; शिआनरेनझांग — अधिक «शुद्ध», बिना भुनी टोन के, भाप-प्रक्रम प्रकार की «तीन हरित» सहित।
निष्कर्षतः:
शिआनरेनझांग चा — वह चाय जिसे चीन के महानतम कवि ने अमरता दान की। 760 ई. में जब ली बाई ने अपने भिक्षु-भतीजे के हाथों से दाओवादी अमर की हथेली-सी प्रतीत होने वाली चपटी हरी पत्ती स्वीकार की, तब उन्होंने उसे केवल नाम ही नहीं दिया — उन्होंने चाय को चीनी काव्य के देवकुल में प्रतिष्ठित कर दिया। बारह शताब्दियों पश्चात् «अमर की हथेली» आज भी युचुआन पर्वत के उसी ढाल पर, उसी मोती स्रोत के समीप, उसी भाप-प्रक्रम तकनीक से निर्मित होती है जो «चाय सिद्धांत»-काल में प्रयुक्त होती थी। इसके «तीन हरित» — हरा पर्ण, हरा आसव, हरा पर्णावशेष — केवल दृश्य विशेषता नहीं, अपितु तांग युग से मूर्त सम्बन्ध हैं: उस समय से जब चाय को भाप दी जाती थी, भुना नहीं जाता था, जब कवि चायों के नाम रखते थे और भिक्षु उन्हें गढ़ते थे। उनके लिए जो केवल पेय नहीं, अपितु सहस्र वर्षों के इतिहास का स्पर्श चाहते हैं — शिआनरेनझांग चा, अमर की हथेली की चाय, अपने हरिताश्म प्याले में आपकी प्रतीक्षा करती है।