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ताचुआन यून वू

Tǎquán yún wù · 塔泉云雾

ताचुआन यून वू — आन्हुई प्रांत के दक्षिणी भाग की एक ऐतिहासिक हरी चाय है, जिसे ‘गाओफेंग यून वू’ (高峰云雾, Gāofēng Yún Wù — ‘ऊँचे शिखर का मेघ-कुहासा’) के नाम से भी जाना जाता है। इसका इतिहास पूर्वी जिन काल से शुरू होता है, जब श्वान्छेंग की चाय पहले से ही राजदरबार को भेंट की जाती थी, फिर चिंग राजवंश में इसका उत्कर्ष हुआ,…

ताचुआन यून वू — आन्हुई प्रांत के दक्षिणी भाग की एक ऐतिहासिक हरी चाय है, जिसे ‘गाओफेंग यून वू’ (高峰云雾, Gāofēng Yún Wù — ‘ऊँचे शिखर का मेघ-कुहासा’) के नाम से भी जाना जाता है। इसका इतिहास पूर्वी जिन काल से शुरू होता है, जब श्वान्छेंग की चाय पहले से ही राजदरबार को भेंट की जाती थी, फिर चिंग राजवंश में इसका उत्कर्ष हुआ, गणतंत्र काल में यह लगभग पूर्णतः विस्मृत हो गई — और 1950 के दशक में इसका पुनर्जन्म हुआ। ताचुआन यून वू चरित्रवान चाय है: सघन, सुगंधित, उज्ज्वल आर्किड-स्वर और गहरे पश्च-स्वाद के साथ, इसका जन्म एक हज़ार मीटर से अधिक ऊँचाई पर होता है, जहाँ बादल सचमुच चाय की झाड़ियों को छूते हैं।

1. वर्गीकरण और उत्पत्ति:

  • प्रकार: हरी चाय (अकिण्वित), 烘青 (होंगचिंग, hōngqīng — तंदूर में निर्धारण के बाद गरम हवा में सुखाना)। यह ‘विशेष’ (特制) होंगचिंग-हरी चायों की श्रेणी में आती है।
  • श्रेणी: ऐतिहासिक प्रसिद्ध चाय (历史名茶, lìshǐ míngchá)। ‘आन्हुई की दस प्रसिद्ध चायों’ (安徽十大名茶) में शामिल।
  • उत्पत्ति: चीन, आन्हुई प्रांत (安徽省, Ānhuī Shěng), श्वान्छेंग नगर (宣城市, Xuānchéng Shì), श्वान्छोऊ जिला (宣州区, Xuānzhōu Qū), शिकोऊ कस्बा (溪口镇, Xīkǒu Zhèn)। उत्पादन का मुख्य क्षेत्र — गाओफेंगशान पर्वत (高峰山, Gāofēng Shān) का उत्तर-पश्चिमी ढलान, ताचुआन (塔泉), झांगवान (张湾), झुआंगवूताई (庄屋台) गाँव, साथ ही तियानझू (天竺村) प्रशासनिक गाँव के बाओकेंग (鲍坑) और मिलोंगता (密龙塔)।
  • भौगोलिक निर्देशांक: लगभग 30°34′ उ.अ., 118°26′ पू.दे. (शिकोऊ क्षेत्र, श्वान्छोऊ, निंगगुओ और चिंगश्येन के संगम पर)।

2. इतिहास और सांस्कृतिक महत्व:

  • इतिहास: श्वान्छेंग (प्राचीन श्वान्छोऊ, 宣州) क्षेत्र चीन के सबसे पुराने चाय उत्पादक क्षेत्रों में से एक है। श्वान्छेंग की चाय का सबसे प्रारंभिक दस्तावेज़ी साक्ष्य पूर्वी जिन (东晋, 317–420) काल का है: युआन-दी (元帝, 317–322) के शासनकाल में, श्वान्छेंग में पदस्थ वेन च्याओ (温峤, Wēn Qiáo) ने राजदरबार में ‘एक हज़ार जिन चाय और तीन सौ जिन मिंग चाय’ (上表贡茶一千斤,供茗三百斤) भेंट की — यह चीन के इतिहास में राजदरबारी भेंट के रूप में चाय का एक प्रारंभिक उल्लेख है। इस प्रकार, श्वान्छोऊ की चाय-कृषि का इतिहास 1700 वर्षों से अधिक पुराना है।

    ‘श्वान्छेंग काउंटी इतिवृत्त’ (《宣城县志》) के अनुसार, नगर से सौ ली दक्षिण में यांगशान पर्वत (阳山) है, और उसके दक्षिण में — गाओफेंगशान (高峰山), ‘जिसका शिखर बादलों से आच्छादित रहता है’ (峰冠云表)। पर्वत की चोटी पर लोहे की खपरैल से छाया एक आश्रम (庵) था, जहाँ ‘मनुष्य बंदरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर रहते थे’ (人多杂猿猴以居)। नीचे ताचुआनआन मठ (塔泉庵) स्थित था, ‘जहाँ प्रसिद्ध चाय उत्पन्न होती थी’ (下有塔泉庵并产名茶)। ‘ताचुआन’ (塔泉 — ‘पगोडा स्रोत’) नाम इसी मठ और उसके समीप के पर्वतीय झरने से आया है। इसी से काव्यात्मक उक्ति निकली: «塔泉尽头水,高峰云雾茶» — ‘ताचुआन के उद्गम पर जल, गाओफेंग के शिखर पर मेघ-चाय।’

    मान्यता है कि ताचुआन यून वू का स्वर्णकाल चिंग राजवंश में, योंगझेंग (雍正, 1723–1735) और विशेषकर च्यानलोंग (乾隆, 1736–1795) के शासनकाल में आया। स्थानीय किंवदंती के अनुसार, सम्राट च्यानलोंग ने इस चाय का स्वाद लेकर कहा था: «天生丽质难自弃,离鼻三尺奇香来» — ‘प्राकृतिक सौंदर्य स्वयं को छिपा नहीं सकता — नाक से तीन ची दूर ही दिव्य सुगंध आने लगती है।’ गणतंत्र काल में उत्पादन का पतन हो गया और चाय व्यावहारिक रूप से लुप्त हो गई। पुनरुत्थान 1955 में आरंभ हुआ। 1980 के दशक में आन्हुई कृषि विश्वविद्यालय के चाय संकाय के प्रोफ़ेसर वांग ज़्हेंगहेंग (王镇恒, Wáng Zhènhéng) और फ़ांग शिहुई (方世辉, Fāng Shìhuì) ने तकनीक की पुनर्स्थापना और उन्नयन का विस्तृत कार्य किया। 1982 में ताचुआन यून वू को राष्ट्रीय प्रसिद्ध चाय प्रतियोगिता में उच्च मूल्यांकन मिला। 1986 में — वाणिज्य मंत्रालय का ‘इष्टतम गुणवत्ता उत्पाद’ (商业部优质产品) का ख़िताब। 2002 में — चीन हरित खाद्य विकास केंद्र से ‘हरित खाद्य’ (绿色食品) प्रमाणपत्र। 2010 में — ‘चीनी प्रसिद्ध चाय’ (中国名茶) श्रेणी में 17वें शंघाई अंतरराष्ट्रीय चाय संस्कृति महोत्सव में स्वर्ण पुरस्कार।

  • नाम: 塔泉 (Tǎquán) — ‘पगोडा स्रोत’, ताचुआनआन (塔泉庵) मठ और उसकी दीवारों के समीप स्थित पर्वतीय झरने के नाम से। 云雾 (yún wù) — ‘बादल और कुहासा’, जो निरंतर मेघाच्छन्न क्षेत्र में उगने वाली उच्च-पर्वतीय चायों का क्लासिकी विशेषण है। वैकल्पिक ऐतिहासिक नाम — गाओफेंग यून वू (高峰云雾) — गाओफेंगशान (高峰山, ‘ऊँचा शिखर’) पर्वत की ओर इशारा करता है।

  • सांस्कृतिक महत्व: ताचुआन यून वू आन्हुई की महान चाय-परंपरा की शृंखला में, ह्वांगशान माओफेंग, ल्यूआन गुआप्यान और थाईफिंग होउकुई के समीप खड़ी है। लू यू के ‘चाय सिद्धांत’ में श्वान्छोऊ क्षेत्र का उल्लेख है: «宣城人秦精,常入武昌山采茗» — ‘श्वान्छेंग का निवासी चिन चिंग सदा वूछांग पर्वत पर चाय तोड़ने जाता था।’ यह आन्हुई में चाय-तुड़ाई का एक प्राचीनतम प्रमाण है। आधुनिक काल में ताचुआन यून वू चीन राज्य-परिषद कार्यालय (国务院办公厅用茶) के लिए चाय थी और, कुछ सूत्रों के अनुसार, ब्रिटिश राजदरबार के लिए निर्यात की गई। प्रतिवर्ष शिकोऊ कस्बे में ‘दक्षिण आन्हुई उच्च-पर्वतीय चाय महोत्सव’ (皖南高山茶叶节) आयोजित होता है, जिसमें ताचुआन यून वू ने बार-बार पहला स्थान प्राप्त किया है।

3. वानस्पतिक विवरण और कच्ची सामग्री:

  • प्रजाति: Camellia sinensis var. sinensis.
  • किस्म / कल्टीवार: मुख्य किस्म — शिकोऊ लियूये झोंग (溪口柳叶种, Xīkǒu Liǔyè Zhǒng — ‘शिकोऊ की विलो पत्ती’), संकरी, लंबी पत्तियों, कलियों पर भरपूर रोमिलता और उच्च सुगंधित यौगिक सामग्री वाला स्थानीय जनसंख्या रूप (群体种)। यह मध्य-मौसमी लघुपत्रीय प्रकार है, जो सदियों से दक्षिण-पश्चिमी आन्हुई की पर्वतीय परिस्थितियों के अनुकूलित है।
  • तुड़ाई: पश्च-वसंत — सामान्यतः चिंगमिंग (清明) के बाद और गूयू (谷雨, ‘अन्न वर्षा’) तक, अर्थात लगभग अप्रैल के आरंभ से अंत तक। बागानों की अधिक ऊँचाई (1000 मी. से ऊपर) के कारण वनस्पति विकास देर से होता है — मार्च में गाओफेंगशान पर प्रायः बर्फ़ जमी रहती है।
  • तुड़ाई का मानक: आरंभिक खुलाव की एक कली और दो पत्तियाँ (一芽二叶初展)। प्ररोह की लंबाई — लगभग 8 से.मी.। प्ररोह साबुत, ताज़ा और समरूप होने चाहिए। ‘चार चयन’ (四选, sì xuǎn) की प्रणाली लागू है: बाग, झाड़ी, शाखा और कली का चयन; साथ ही ‘आठ वर्जनाएँ’ (八不采, bā bù cǎi): अति छोटे या बड़े प्ररोह न तोड़ें, बिना कली की पत्तियाँ न तोड़ें, वर्षा में न तोड़ें, मध्याह्न की तपन में न तोड़ें इत्यादि।
  • तुड़ाई विधि: केवल ‘सहारे से तोड़’ (提折采法, tízhé cǎifǎ) — प्ररोह को साफ़-सुथरा मरोड़कर तोड़ा जाता है, नाखून से नहीं उखाड़ा जाता (नाखून-चुटकी विधि, 指甲捏采, निषिद्ध है)। कच्ची सामग्री स्वच्छ बाँस की टोकरियों में लाई जाती है, दबाई नहीं जाती, नम नहीं की जाती।

4. भूक्षेत्र और कृषि-विशेषताएँ:

  • उत्पादन ऊँचाई: उत्पादन का केंद्र — गाओफेंगशान पर्वत का उत्तर-पश्चिमी ढलान, लगभग 1155 मी. की ऊँचाई पर। यह श्वान्छोऊ, निंगगुओ (宁国) और चिंगश्येन (泾县) के संगम पर स्थित पर्वतमाला की सर्वोच्च बिंदुओं में से एक है।
  • उच्चावच: पर्वत-श्रेणियाँ — ह्वांगशान शाखाओं (黄山余脉) का विस्तार। क्षेत्र ‘बहुस्तरीय’ है: चोटियाँ घाटियों में बदलती हैं, सरिताएँ तीव्र ढलानों के बीच घूमती हैं। बागान वनपट्टी के ऊपरी भाग में, बादलों के बीच स्थित हैं।
  • जलवायु: समशीतोष्ण उपोष्णकटिबंधीय। औसत वार्षिक तापमान — 15.4 °C (अभिलिखित न्यूनतम — 13.7 °C, अधिकतम — 40 °C)। वार्षिक वर्षा — लगभग 1400 मि.मी.। तुषार-रहित अवधि — 229 दिन। लघु दिवालोक (पहाड़ सूर्य को ढाँक लेते हैं) और सतत सुबह/शाम के कुहासे — गुणवत्ता के प्रमुख कारक हैं।
  • मृदा: गहरी, सुजल-निकासी, अम्लीय (pH ≈ 5.5)। मूल चट्टान — अपक्षयित पर्वतीय स्लेट, जिसमें खनिजों की उच्च मात्रा है।
  • पारिस्थितिकी: क्षेत्र का वनाच्छादन — 87% से अधिक। बागान पृथुस्पती और शंकुधारी वनों के प्राकृतिक परिवेश में समृद्ध जैव-विविधता के साथ स्थित हैं। प्रत्यक्ष सूर्यप्रकाश की अपेक्षा परिक्षिप्त प्रकाश (漫射光) अधिक रहता है — यह एल-थियानिन के क्षय को धीमा करता है और अमीनो अम्लों का संचय करता है, जो चाय को विशिष्ट माधुर्य और गहराई प्रदान करता है।

5. उत्पादन तकनीक:

ताचुआन यून वू ‘विशेष होंगचिंग-हरी चायों’ (特制烘青绿茶) की श्रेणी का प्रतिनिधि है, अर्थात निर्धारण भूनकर किया जाता है और अंतिम शुष्कीकरण — गरम वायु द्वारा (पूर्णतः भूनकर सुखाई गई चाओचिंग-चायों के विपरीत)। तकनीक में आठ चरण हैं और यह 1980 के दशक में पुनर्स्थापित तथा उन्नत पारंपरिक विधियों पर आधारित है:

  • तुड़ाई और फैलाव (鲜叶采摘·摊放, cǎizhāi · tānfàng): तुड़ाई के उपरांत प्ररोहों को स्वच्छ, ठंडे, हवादार कक्ष में बाँस की चटाइयों पर पतली परत में फैलाया जाता है। फैलाव का समय — 4–8 घंटे (अधिकतम 10)। पत्ती की सतही चमक खत्म हो जाती है, वह मुलायम हो जाती है, नमी की मात्रा 70–72% तक कम हो जाती है, एक ताज़ा सुगंध उभरती है — यह निर्धारण के लिए तत्परता का संकेत है।
  • निर्धारण / शाचिंग (杀青, shāqīng): समतल कड़ाही (平口锅) में दीवार के तापमान 110–200 °C पर किया जाता है (सिद्धांत ‘पहले उच्च, फिर निम्न’)। हाथ से भूनते समय एक बार की मात्रा — 220–250 ग्राम। पहले 1–2 मिनट में — त्वरित तापन हेतु धीमा चलन; फिर — नमी, घास जैसी गंध और जलने से बचाने के लिए ऊँचा उछाल (高抛抖翻)। लगभग 5 मिनट में पत्ती गहरे हरे रंग की हो जाती है, मुलायम होती है, प्राथमिक चाय की सुगंध आती है। नमी — लगभग 60%। यांत्रिक निर्धारण भी संभव है — दोनों में मुख्य सिद्धांत: ‘पूरी तरह से भुनना, समान रूप से भुनना, बिना लाल डंठल या पत्तियों के, बिना जले किनारों के’ (杀透杀匀,无红梗红叶,无焦边爆点)।
  • मर्दन और आकार-निर्माण (揉捻·做形, róuniǎn · zuòxíng): निर्धारण के बाद ठंडी हुई पत्ती को मर्दन करके संहत, सघन चाय-कण बनाए जाते हैं। दबाव की मात्रा भावी निषेक की समृद्धि निर्धारित करती है। ताचुआन यून वू को कसे हुए, थोड़े टेढ़े-मेढ़े तकली आकार के कणों में रूपांकित किया जाता है।
  • प्राथमिक शुष्कीकरण (初烘, chū hōng): मध्यम तापमान पर अँगीठी पर प्रारंभिक सुखाना।
  • विश्राम / ठंडा करना (摊凉, tānliáng): कण के भीतर अवशिष्ट नमी का पुनर्वितरण — सुगंध की समरूपता के लिए महत्वपूर्ण चरण।
  • पुनः शुष्कीकरण (复烘, fù hōng): स्थायी नमी की मात्रा ≤ 7% होने तक अंतिम सुखाना। यहीं पर आर्किड-स्वर (兰花香) निखरता है — ताचुआन यून वू की विशिष्ट पहचान।
  • अपशोधन (干茶拣剔, gānchá jiǎntī): हाथ से अमानक कण, कठोर डंठल और टुकड़े हटाना।
  • ग्रेडिंग और पैकिंग (分级包装, fēnjí bāozhuāng): तैयार चाय को ग्रेडों में विभाजित कर पैक किया जाता है।

6. संवेदी गुण:

  • सूखी पत्ती का बाह्य रूप: सघन, संहत, थोड़े टेढ़े कण (条紧匀细), मांसल और भारी (肥壮重实)। रंग — गहरा हरा, तैलीय चमक सहित (色绿油润)। सफ़ेद रोमिलता पृष्ठ पर प्रचुरता से छायी रहती है, हल्की चाँदी जैसी झलक बनाती हुई (白毫裹身)।
  • सूखी पत्ती की सुगंध: उज्ज्वल और ताज़ी, प्रमुख आर्किड-स्वर (兰花香) और हल्का चेस्टनट-आभास लिए।
  • निषेक की सुगंध: स्पष्ट आर्किड-सुगंध (兰花香气明显) — स्वच्छ, उच्च और स्थायी। यह ताचुआन यून वू का ‘विजिटिंग कार्ड’ है, जो इसे अधिकांश आन्हुई हरी चायों से अलग करता है।
  • स्वाद: सघन और तैलीय (醇厚, chúnhòu), गहरी मिठास के साथ। पश्च-स्वाद — दीर्घ, स्पष्ट माधुर्य-पुनरागम (甘甜生津, gāntián shēngjīn) और ताज़गी की अनुभूति के साथ, जो कई मिनटों तक मुँह में बनी रहती है। विशिष्टता «淡中有回味» (dàn zhōng yǒu huíwèi — ‘प्रतीत होने वाली हल्कापन में — पश्च-स्वाद की गहराई’) इस चाय की शैली को सटीक रूप से परिभाषित करती है।
  • निषेक का रंग: पारदर्शी, चमकीला, कोमल हरे से पीत-हरा (清澈明丽)। निषेक की शुद्धता — उच्च।
  • चाय-आधार (叶底, yèdǐ): पीताभ-हरा, कोमल (芽叶嫩黄绿), मुलायम, लचीला, सुरक्षित कलियों और पत्तियों सहित।

7. रासायनिक संघटन:

  • पॉलिफ़ीनॉल (茶多酚): शुष्क भार का लगभग 27.15% (ताचुआन के केंद्रीय क्षेत्र की कच्ची सामग्री के विश्लेषण के अनुसार)। मुख्य भिन्न — कैटेचिन (EGCG, EGC, ECG)।
  • अमीनो अम्ल (氨基酸): उच्च सामग्री — शुष्क भार का 4.18%। यह उच्च सूचकांक स्पष्ट मिठास और ‘उमामी’-आभास प्रदान करता है। एल-थियानिन — प्रमुख अमीनो अम्ल।
  • ऐल्केलॉइड: कैफ़ीन (咖啡碱) — ~2.5–4%। थियोब्रोमिन और थियोफ़िलिन — अल्प मात्रा में।
  • जल-विलेय निष्कर्षणीय पदार्थ (水浸出物): उच्च सामग्री — आन्हुई हरी चायों के औसत से ऊपर, जो निषेक की समृद्धि और ‘गाढ़ापन’ स्पष्ट करती है।
  • विटामिन: C (ऐस्कॉर्बिक अम्ल — कोमल होंगचिंग-तकनीक के कारण सुरक्षित रहता है), B₁, B₂, E, K।
  • खनिज: पोटैशियम, मैंगनीज़, ज़िंक, फ़्लोरीन, फ़ॉस्फ़ोरस।
  • वाष्पशील तेल एवं वाष्पशील यौगिक: लिनलूल, लिनलूल ऑक्साइड, नेरोलिडॉल, जेरानियॉल, इंडॉल — जटिल आर्किड-सुगंध का निर्माण करते हैं। मेथिल सैलिसिलेट — ताज़ा ‘हरे’ स्वर के लिए उत्तरदायी।
  • विशेषता: पॉलिफ़ीनॉल और अमीनो अम्लों का अनुपात (27.15 : 4.18 ≈ 6.5 : 1) उच्च-गुणवत्ता वाली हरी चायों के लिए इष्टतम क्षेत्र में है: पॉलिफ़ीनॉल ‘गाढ़ेपन’ के लिए पर्याप्त, किंतु अमीनो अम्ल कटुता को मृदु करते हैं और मिठास जोड़ते हैं।

8. लाभकारी गुण:

  • प्रतिऑक्सीकारक सुरक्षा: उच्च कैटेचिन सामग्री (विशेषकर EGCG) मुक्त मूलकों के विरुद्ध शक्तिशाली निराकरण क्रिया प्रदान करती है, जो कोशिकीय जरावस्था को धीमा करती है।
  • टॉनिक और एकाग्रता: क्लासिक ‘कैफ़ीन + एल-थियानिन’ युग्म बिना घबराहट के ध्यान में कोमल वृद्धि सुनिश्चित करता है — प्रातःकालीन या कार्य-चाय के लिए आदर्श।
  • हृद्-वाहिका तंत्र: पॉलिफ़ीनॉल वाहिका-भित्तियों की लोच बनाए रखने और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को सामान्य करने में सहायक होते हैं।
  • पाचन: हरी चाय जठर रस के स्राव और आंत्र गतिकी को उत्तेजित करती है। ताचुआन यून वू अपने सघन गाढ़ेपन के साथ — भोजनोपरांत चाय के लिए उत्तम साथी है।
  • प्रतिरक्षा: विटामिन C और पॉलिफ़ीनॉल शरीर की रक्षा क्रियाओं में सहायक होते हैं।
  • संज्ञानात्मक प्रकार्य: एल-थियानिन मस्तिष्क की अल्फ़ा तरंगों के सृजन को उद्दीपित करता है, विश्रांत एकाग्रता और सृजनात्मक चिंतन की स्थिति में सुधार करता है।
  • मुख गुहिका: फ़्लोरीन और कैटेचिन रोगजनक जीवाणुओं की वृद्धि को दबाते हैं, दंत-क्षय का जोखिम घटाते हैं और श्वास को ताज़ा करते हैं।
  • महत्वपूर्ण: पॉलिफ़ीनॉल की स्पष्ट मात्रा के कारण संवेदनशील उदर वाले व्यक्तियों को इस चाय को खाली पेट नहीं पीना चाहिए। इष्टतम — भोजन के 30–60 मिनट पश्चात।

9. चाय बनाने की विधि:

  • जल का तापमान: 90–95 °C — कई कोमल हरी चायों की तुलना में स्पष्टतः अधिक गर्म। ताचुआन यून वू की सघन पत्ती को सुगंध और स्वाद के पूर्ण प्रस्फुटन के लिए उच्च तापमान की आवश्यकता होती है।
  • चाय की मात्रा: 200 मि.ली. (गिलास) के लिए 3–4 ग्राम या 150 मि.ली. के कुंड (गाइवान) के लिए 5 ग्राम।
  • पात्र: सीधी दीवारों वाला पारदर्शी काँच का गिलास — चाय-कणों के सर्वोत्तम अवलोकन हेतु अनुशंसित। ‘ऊपरी जल-प्रवाह विधि’ (上投法, shàngtóu fǎ): पहले गर्म जल डाला जाता है, फिर सावधानी से चाय-कण डाले जाते हैं — वे धीरे-धीरे डूबते हैं, खुलते जाते हैं। चीनी मिट्टी का गाइवान या काँच की चायदानी भी उपयुक्त हैं।
  • प्रक्रिया:
    1. पात्र को खौलते पानी से गरम करें, उँडेल दें।
    2. 90–95 °C का पानी गिलास की 2/3 मात्रा तक डालें।
    3. सूखी पत्ती सावधानीपूर्वक जल में डालें।
    4. पहला निषेक — 1.5–2 मिनट (गिलास)। सुगंध श्वास से लें: आर्किड स्वर पहले ही प्रवाह से खुलने चाहिए।
    5. पिएँ, पुनः जल डालने से पहले निषेक का लगभग एक-तिहाई गिलास में छोड़ दें।
    6. पुनः जल-प्रवाहों की संख्या — 2–3 (गिलास) या 4–6 प्रवाह (गाइवान, प्रति 30–60 सेकंड, बढ़ते समय के साथ)।

10. भंडारण:

  • पात्र: वायुरोधी, अपारदर्शी — धातु के डब्बे या निर्वात फ़ॉइल पैकेट।
  • तापमान: कठोर वायुरोधिता पर रेफ़्रिजरेटर 0–5 °C। पैकेट खोलने से पहले — कक्षीय तापमान तक लाएँ, ताकि संघनन न हो।
  • प्रकाश और नमी: परम शत्रु। रसोई के मसालों, इत्र, औषधियों से दूर रखें।
  • अवधि: संपूर्ण स्वाद के लिए 6–12 मास। होंगचिंग-हरी चायें भंडारण में चाओचिंग-हरी चायों की अपेक्षा थोड़ी अधिक स्थायी होती हैं, फिर भी ‘युवा पीने’ का सिद्धांत पूर्णतः लागू है।

11. मूल्य और नकली चाय:

  • मूल्य श्रेणी: आन्हुई हरी चायों में मध्यम और मध्यम-उच्च खंड। केंद्रीय क्षेत्र (ताचुआन गाँव, ~1155 मी. ऊँचाई) की चाय समीपवर्ती मैदानी क्षेत्रों की उपज की तुलना में काफ़ी महँगी है। ताचुआन यून वू ‘पारखियों की चाय’ की आला पर क़ाबिज़ है — ह्वांगशान माओफेंग की अपेक्षा व्यापक जनता में कम ज्ञात, किंतु गहरे चरित्र के लिए विशेषज्ञों द्वारा मूल्यवान।
  • नकली से कैसे बचें:
    • उत्पत्ति की पुष्टि के साथ शिकोऊ (溪口镇) के उत्पादकों से ख़रीदें। ‘हरित खाद्य’ (绿色食品) प्रमाणपत्र — अतिरिक्त गारंटी है।
    • बाह्य रूप का मूल्यांकन करें: असली ताचुआन यून वू — सघन, ठोस कण, तैलीय चमक और प्रचुर सफ़ेद रोम सहित। ढीले, फीके पत्ते — प्रतिस्थापन के संकेत हैं।
    • सुगंध: आर्किड-स्वर प्राकृतिक होना चाहिए, बिना तीखेपन और ‘कैरमल’ जैसी मिठास के।
    • निषेक: पारदर्शी, कोमल हरा। धुंधलापन या भूरापन — चेतावनी संकेत।
    • स्वाद: पहली चुस्की कोमल लग सकती है, किंतु पश्च-स्वाद गहरा और दीर्घ होना चाहिए (淡中有回味)। पश्च-स्वाद की अनुपस्थिति नकली को उजागर करती है।

12. रोचक तथ्य:

  • उत्पादन क्षेत्र तीन जिलों के संगम पर स्थित है — श्वान्छोऊ, निंगगुओ और चिंगश्येन — और ह्वांगशान (黄山余脉) पर्वतमाला का विस्तार है। वस्तुतः ताचुआन यून वू ह्वांगशान की प्रसिद्ध चायों का ‘कनिष्ठ भ्राता’ है, जो उन्हीं भूवैज्ञानिक संरचनाओं पर उगता है।
  • ताचुआनआन मठ (塔泉庵), जिसने चाय को नाम दिया, गाओफेंगशान की ढलान पर स्थित था। ‘श्वान्छेंग काउंटी इतिवृत्त’ के अनुसार, इसकी छत लोहे की खपरैल (铁瓦) से छायी थी, और निवासी ‘बंदरों के साथ पार्श्व-से-पार्श्व रहते थे’ — यह छवि अन्य आन्हुई पर्वतीय क्षेत्रों में प्रचलित ‘बंदरों द्वारा तोड़ी चाय’ (猴采茶) की गाथा से गूँजती है।
  • गणतंत्र काल में लुप्त होने के बाद, चाय 1955 में पुनर्जीवित हुई, और तकनीकी विकास 1980 के दशक में आन्हुई कृषि विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसरों वांग ज़्हेंगहेंग और फ़ांग शिहुई ने किया — एक दुर्लभ अवसर जब अकादमिक विज्ञान ने सीधे एक ऐतिहासिक चाय को ‘पुनर्जीवित’ किया।
  • ताचुआन यून वू कुछ समय तक ‘चीन राज्य-परिषद कार्यालय की चाय’ (国务院办公厅用茶) के रूप में आपूर्ति की गई, और कतिपय खेप ब्रिटिश राजदरबार (出口英国皇室) को निर्यात की गईं।
  • शिकोऊ में वार्षिक ‘उच्च-पर्वतीय चाय महोत्सव’ (皖南高山茶叶节) — दक्षिण आन्हुई की प्रमुख चाय-घटनाओं में से एक है। ताचुआन यून वू ने महोत्सव की मूल्यांकन प्रतियोगिताओं में बारंबार विजय प्राप्त की है, लगातार तीन वर्ष प्रथम स्थान पाया है।

13. अन्य हरी चायों से तुलना:

  • ह्वांगशान माओफेंग (黄山毛峰, Huángshān Máofēng): सबसे प्रसिद्ध आन्हुई हरी चाय। माओफेंग — होंगचिंग, ताचुआन यून वू की तरह, किंतु अधिक कोमल कच्ची सामग्री (कली + पहली पत्ती) से, ‘पक्षी-जिह्वा’ जैसे मुड़े आकार और सूक्ष्म मीठी सुगंध के साथ। ताचुआन यून वू — अधिक सघन और ‘पेशीय’, अधिक स्पष्ट आर्किड-स्वर और गहरे पश्च-स्वाद सहित। माओफेंग — रेशम, ताचुआन — मख़मल।
  • चिंगश्येन लानश्यांग (泾县兰香, Jīngxiàn Lánxiāng): समीपवर्ती चिंगश्येन जिले की हरी चाय — ‘आर्किड-परिवार’ का एक अन्य प्रतिनिधि। लानश्यांग — अधिक महीन और लंबतान आकार की, पारदर्शी पुष्प-सुगंध के साथ। ताचुआन यून वू — अधिक संहत, भारी, गाढ़ेपन की अधिक परिपूर्णता के साथ।
  • लूशान यून वू (庐山云雾, Lúshān Yún Wù): च्यांग्शी की ‘मेघ-चाय’, ‘दस महान’ की सूची से। अधिक बड़ी पत्ती, मोटी दीवार के कण, स्पष्ट कसैलापन। ताचुआन यून वू — अधिक ललित और सुगंधित, मिठास और कटुता का बेहतर संतुलन लिए।
  • चिंगथिंग ल्यूश्वे (敬亭绿雪, Jìngtíng Lǜ Xuě): श्वान्छेंग की एक अन्य ऐतिहासिक हरी चाय, चिंगथिंगशान पर्वत से। इसमें ‘हिम’ प्रभाव है — सफ़ेद रोम, चाय-कणों से अलग होकर, पकते समय हिम-कणों की भाँति धीरे-धीरे डूबते हैं। शैली — अधिक हल्की और ध्यानपरक। ताचुआन यून वू — अधिक सघन, ‘भारी’ और समृद्ध।

निष्कर्षतः:

ताचुआन यून वू — नियति वाली चाय। हज़ार मीटर की ऊँचाई पर जन्मी, (किंवदंती के अनुसार) स्वयं च्यानलोंग द्वारा प्रशंसित, बीसवीं सदी की आँधियों में खोई और विद्वानों के प्रयासों से पुनर्जीवित — यह अपने में वही ‘प्रतीत होने वाली लघुता के पीछे गहराई’ लिए है, जो महान आन्हुई चायों को विभेदित करती है। इसकी आर्किड-सुगंध, सघन तैलीय गाढ़ापन और दीर्घ बढ़ती मिठास इसे उनके लिए एक खोज बनाती है जो माओफेंग और होउकुई से पहले से परिचित हैं और कुछ नया, किंतु कम योग्य नहीं, ढूँढ़ रहे हैं। इसे थोड़ा गरम — 90–95 °C पर बनाएँ, हरी पत्ती को कोमलता देने की आदत के विपरीत — और यह उस परिपूर्णता से उत्तर देगी, जिसकी बादल से अपेक्षा नहीं की जाती।