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रेनशेन ऊलोंग
Rénshēn wūlóng · 人参乌龙
रेनशेन ऊलोंग चाय और जड़ी-बूटी परम्पराओं का एक असामान्य मिश्रण है: ऊलोंग चाय को जिनसेंग चूर्ण और अन्य जड़ी-बूटियों में लपेटा जाता है, जिससे प्रत्येक दाने पर एक विशिष्ट ‘शीशे जैसी’ परत बन जाती है। यह स्पष्ट ‘स्वास्थ्यवर्धक’ स्थिति वाली चाय है: यह ऊलोंग के हल्के टॉनिक प्रभाव को जिनसेंग के अनुकूलनजन्य (एडॉप्टोजेनिक) गुणों…
रेनशेन ऊलोंग चाय और जड़ी-बूटी परम्पराओं का एक असामान्य मिश्रण है: ऊलोंग चाय को जिनसेंग चूर्ण और अन्य जड़ी-बूटियों में लपेटा जाता है, जिससे प्रत्येक दाने पर एक विशिष्ट ‘शीशे जैसी’ परत बन जाती है। यह स्पष्ट ‘स्वास्थ्यवर्धक’ स्थिति वाली चाय है: यह ऊलोंग के हल्के टॉनिक प्रभाव को जिनसेंग के अनुकूलनजन्य (एडॉप्टोजेनिक) गुणों के साथ जोड़ती है। हालाँकि, रेनशेन ऊलोंग का बाज़ार अत्यंत विषम है – प्रामाणिक कोरियाई जिनसेंग वाले प्रीमियम ताइवानी बैचों से लेकर सस्ती फ़ुज़ियान चाय तक, जहाँ जिनसेंग पूरी तरह मुलेठी से बदल दिया जाता है।
1. वर्गीकरण और उत्पत्ति:
- प्रकार: पादप सामग्री-युक्त ऊलोंग (सुगंधित / सुदृढ़ीकृत)। आधार ऊलोंग – हल्की या मध्यम किण्वित (15–35% ऑक्सीकरण)।
- श्रेणी: योजकों वाली चाय; स्वास्थ्यवर्धक चाय। इसे ‘लैन गुई रेन’ (兰贵人, Lán Guìrén – ‘कुलीन आर्किड’) के नाम से भी जाना जाता है, विशेषकर चीन में।
- उत्पत्ति: कोई एक क्षेत्र नहीं है। मुख्य उत्पादन केन्द्र:
- ताइवान: नान्तोउ (南投) और च्याई (嘉义) जिले। प्रीमियम बैच उच्च-पर्वतीय ऊलोंग (अलीशान, डोंग डिंग, जिन शुआन) पर आधारित।
- फ़ुज़ियान, चीन: आन्शी (安溪) जिला – टिए गुआनयिन, माओ शिए, बेन शान पर आधारित बड़े पैमाने पर उत्पादन। रूसी और मध्य एशियाई बाज़ारों के लिए मुख्य आपूर्तिकर्ता।
- गुआंगदोंग, चीन: कभी-कभी, डान्चोंग या स्थानीय ऊलोंग पर आधारित।
- भौगोलिक निर्देशांक: ~25° उ.अ., ~118° पू.दे. (आन्शी); ~23°50’ उ.अ., ~120°40’ पू.दे. (नान्तोउ)।
2. इतिहास और सांस्कृतिक महत्त्व:
- इतिहास: रेनशेन ऊलोंग 20वीं शताब्दी के अंत में प्रकट हुआ – मुख्यतः दक्षिण-पूर्व एशिया, रूस और सीआईएस देशों के बाज़ारों के लिए निर्यात उत्पाद के रूप में। चाय को जिनसेंग के साथ संयोजित करने की परम्परा की जड़ें चीनी चिकित्सा में हैं: मिंग राजवंश (明, 1368–1644) के ग्रंथों में पहले से ही चाय की पत्ती और जिनसेंग जड़ को एक साथ उबालने का उल्लेख क्यूई (气) को सुदृढ़ करने के लिए किया गया था। हालाँकि, औद्योगिक प्रारूप – तैयार ऊलोंग को जड़ी-बूटी के चूर्ण में लपेटना – केवल 1980-1990 के दशक में ताइवान में प्रकट हुआ, जहाँ से यह तकनीक फ़ुज़ियान में फैल गई। वैकल्पिक नाम ‘लैन गुई रेन’ (兰贵人, ‘कुलीन आर्किड’) को सम्राट च्यानलोंग की एक उपपत्नी की कथा से जोड़ा जाता है, जो दक्षिणी प्रांतों की मूल निवासी थी और दरबार में जिनसेंग-युक्त चाय की विधि लाई थी। यह कथा संभवतः 20वीं शताब्दी का विपणन आख्यान है, किन्तु व्यापारिक परम्परा में मजबूती से स्थापित हो गई है।
- नाम:
- ‘रेनशेन’ (人参, Rénshēn) – जिनसेंग (Panax ginseng)। ‘रेन’ (人) – मनुष्य; ‘शेन’ (参) – मानव आकृति जैसी जड़।
- ‘ऊलोंग’ (乌龙, Wūlóng) – ‘काला अजगर’, अर्ध-किण्वित चायों का सामान्य नाम।
- सांस्कृतिक महत्त्व: चीन में रेनशेन ऊलोंग प्रतिष्ठित चायों की श्रेणी में नहीं आती और इसे ‘कार्यात्मक पेय’ के रूप में देखा जाता है। रूस और सीआईएस देशों में, इसके विपरीत, यह विशेषीकृत चाय की दुकानों में एक स्पष्ट स्थान रखती है और इसे एक टॉनिक और उपयोगी चाय के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। अपने मूल देश और विदेश में धारणा का अंतर – इस उत्पाद की एक विशिष्ट विशेषता है।
3. वानस्पतिक विवरण और कच्ची सामग्री:
चाय का आधार
- आधार किस्में: टिए गुआनयिन (铁观音), बेन शान (本山), माओ शिए (毛蟹) – बड़े पैमाने पर फ़ुज़ियान संस्करणों के लिए; जिन शुआन (金萱, Jīn Xuān), चिंग शिन ऊलोंग (青心乌龙) – प्रीमियम ताइवानी संस्करणों के लिए। Camellia sinensis var. sinensis।
- तुड़ाई मानक: कली + 2–3 पत्तियाँ। तुड़ाई आधार ऊलोंग पर निर्भर करती है (आन्शी के लिए वसंत–शरद ऋतु; ताइवान के लिए वसंत और शीत ऋतु)।
जड़ी-बूटी का आवरण
- जिनसेंग: Panax ginseng C. A. Meyer (कोरियाई/चीनी जिनसेंग) या Panax quinquefolius (अमेरिकी जिनसेंग) की जड़ – बारीक पीसा हुआ चूर्ण। प्रमुख सक्रिय पदार्थ – जिन्सेनोसाइड (ट्राइटरपीन सैपोनिन), जिनमें अनुकूलनजन्य, टॉनिक और प्रतिरक्षा-नियामक प्रभाव होते हैं।
- मुलेठी (甘草, gāncǎo): Glycyrrhiza glabra या G. uralensis की जड़ – लगभग सभी व्यावसायिक व्यंजनों में प्रयुक्त। इसमें ग्लाइसीर्राइज़िन होता है, जो अत्यधिक प्राकृतिक मिठास प्रदान करता है (सुक्रोज़ से 50 गुना अधिक मीठा)। सस्ते संस्करणों में मुलेठी जिनसेंग को पूरी तरह बदल सकती है।
- अन्य घटक: चूर्ण के आवरण में चावल का आटा (चिपचिपाहट के लिए), स्टीविया चूर्ण, कभी-कभी – एस्ट्रागलस जड़ (黄芪, huángqí) या गोजी बेरी (枸杞, gǒuqǐ) के टुकड़े शामिल हो सकते हैं।
4. टेरुआर और उत्पादन की विशेषताएँ:
टेरुआर आधार ऊलोंग द्वारा निर्धारित होता है, न कि जड़ी-बूटी के योजकों द्वारा।
आन्शी, फ़ुज़ियान (बड़े पैमाने पर उत्पादन)
- ऊँचाई: 400–800 मी. उपोष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु, लाल लैटेराइट मिट्टी।
- विशेषता: उच्च उपज, सस्ती कच्ची सामग्री। चाय पूरे वर्ष बनाई जाती है; रेनशेन ऊलोंग के लिए अक्सर ग्रीष्म और शरद ऋतु की तुड़ाई का प्रयोग किया जाता है – जो शुद्ध ऊलोंग के लिए कम मूल्यवान होती है, किन्तु जड़ी-बूटी प्रसंस्करण के लिए आधार के रूप में पर्याप्त उपयुक्त।
नान्तोउ / च्याई, ताइवान (प्रीमियम)
- ऊँचाई: 300–1200 मी. ठंडा सूक्ष्म-जलवायु, बार-बार कोहरा।
- विशेषता: आधार ऊलोंग – अधिक सुगंधित और मीठा, जो तैयार उत्पाद को अधिक जटिल और सामंजस्यपूर्ण प्रोफ़ाइल देता है।
5. उत्पादन तकनीक:
उत्पादन में दो चरण होते हैं: आधार ऊलोंग का निर्माण और फिर जड़ी-बूटी का आवरण चढ़ाना।
चरण I: आधार ऊलोंग
- तुड़ाई (采摘, cǎi zhāi): हाथ या मशीन से।
- मुरझाना (萎凋, wěidiāo): धूप या छाँव में, 2–6 घंटे।
- हिलाना (摇青, yáo qīng): 3–4 चक्र, विश्राम के साथ। ऑक्सीकरण आरंभ करना।
- किण्वन (发酵, fājiào): 15–35%।
- स्थिरीकरण (杀青, shā qīng): उच्च-तापमान भूनना।
- मरोड़ना (揉捻, róuniǎn): कपड़े में मरोड़ना (布揉, bù róu), अर्ध-गोलाकार आकार।
- प्रारंभिक सुखाना (初烘, chū hōng).
चरण II: जड़ी-बूटी आवरण का लेप (裹粉, guǒ fěn)
सबसे प्रचलित विधि – चूर्ण में लपेटना (裹粉法):
- अर्ध-गोलाकार ऊलोंग के थोड़े सूखे दानों को घूमने वाले ड्रम में रखा जाता है।
- जड़ी-बूटी का चूर्ण (जिनसेंग + मुलेठी + बांधक) लगातार घुमाते हुए दानों पर छिड़का जाता है। ड्रम में तापमान – 60–80°C।
- ‘चूर्ण लगाना → सुखाना → अगली परत लगाना’ का चक्र 3–5 बार दोहराया जाता है, जिससे विशिष्ट घनी ‘चमकदार’ परत बनती है।
- अंतिम सुखाना 80–100°C पर, आर्द्रता ≤6% तक।
वैकल्पिक विधियाँ:
- अर्क प्रसंस्करण: दानों पर जिनसेंग के सांद्रित जलीय अर्क का छिड़काव किया जाता है, फिर पूरी तरह सुखाया जाता है। परत पतली होती है, सुगंध कम तीव्र।
- मिश्रण: तैयार ऊलोंग + कटी हुई जिनसेंग जड़ एक पैकेट में (दुर्लभ; वास्तविक तकनीक से अधिक विपणन चाल)।
6. संवेदी विशेषताएँ:
- सूखी पत्ती का बाह्य रूप: घने अर्ध-गोलाकार दाने, मटमैली हरी-बेज या भूरी जड़ी-बूटी चूर्ण की ‘चमक’ से ढके। दाने भारी, एकसमान आकार के। सतह खुरदरी। प्रीमियम संस्करणों में चूर्ण की परत पतली होती है, आधार ऊलोंग की हरियाली दिखाई देती है।
- सूखी पत्ती की सुगंध: मीठी, जिनसेंग की प्रमुख मिट्टी-मसालेदार नोट और मुलेठी की तीव्र मिठास के साथ। प्रीमियम संस्करणों में – आधार ऊलोंग के अतिरिक्त पुष्पीय और मक्खनीय रंग।
- अर्क की सुगंध: सूखी पत्ती की तुलना में कम तीव्र। मीठी-मसालेदार, जिनसेंग की जड़ी-बूटी ‘औषधीय’ झलक, मुलेठी की माधुरी, और – अच्छे संस्करणों में – ऊलोंग की उभरती पुष्पीयता के साथ।
- स्वाद: पहला प्रवाह – गाढ़ा, मसालेदार-मीठा, विशिष्ट जिनसेंग कड़वाहट (जड़, मिट्टी, मसाले) और मुलेठी की लिपटी मिठास के साथ। दूसरा–तीसरा प्रवाह – जड़ी-बूटी की परत हटती है, आधार ऊलोंग का चरित्र प्रकट होता है: पुष्पीय, मक्खनीय, फल नोट। बाद का स्वाद – लंबा, मीठा, गरम ‘जड़’ के संकेत के साथ। स्वाद विशिष्ट, ‘सबको पसंद नहीं आता’ – अनभ्यस्त व्यक्ति को यह औषधीय लग सकता है।
- अर्क का रंग: सुनहरा-पीला से एम्बर तक। पहले प्रवाहों में – जड़ी-बूटी चूर्ण के घुलने से थोड़ा धुँधला; तीसरे प्रवाह तक – साफ़ और पारदर्शी।
- चाय का तल: चूर्ण धुल जाने के बाद खुली ऊलोंग पत्तियाँ – लाल किनारी के साथ हरी। तल में – जिनसेंग और मुलेठी के कणों का अवशेष।
7. रासायनिक संरचना:
आधार ऊलोंग से:
- पॉलीफ़ेनॉल (कैटेचिन): EGCG, EGC – प्रतिऑक्सीकारक। सामग्री ~15–20% चाय आधार के शुष्क द्रव्यमान का।
- अमीनो अम्ल: L-थीनाइन (~1–1.5%) – उमामी, विश्रांति।
- कैफ़ीन: ~20–35 मि.ग्रा./ग्रा. (मध्यम)।
- विटामिन: C, समूह B। खनिज: पोटैशियम, फ्लोरीन, मैग्नीशियम, मैंगनीज़।
जड़ी-बूटी आवरण से:
- जिन्सेनोसाइड (Rb1, Rg1, Re और अन्य): जिनसेंग के प्रमुख सक्रिय पदार्थ। अनुकूलनजन्य, टॉनिक, प्रतिरक्षा-नियामक प्रभाव। आवरण में सामग्री सच्चे जिनसेंग के अनुपात (5% से 30%) पर निर्भर करती है।
- ग्लाइसीर्राइज़िन: मुलेठी से। तीव्र मिठास देता है। सूजनरोधी और कफ़निस्सारक प्रभाव रखता है, पर अत्यधिक सेवन (>100 मि.ग्रा./दिन) रक्तचाप बढ़ा सकता है।
- जिनसेंग पॉलीसैक्कराइड: प्रतिरक्षा-नियमन।
महत्त्वपूर्ण: व्यावसायिक बैचों में जिन्सेनोसाइड की वास्तविक मात्रा बहुत भिन्न होती है। सस्ते संस्करणों में जिनसेंग आवरण का 5% से कम हो सकता है – शेष मुलेठी और चावल का आटा।
8. उपयोगी गुण:
- टॉनिक और अनुकूलनजन्य प्रभाव: त्रिस्तरीय तालमेल – कैफ़ीन (तेज़ टॉनिक) + L-थीनाइन (हल्की विश्रांति) + जिन्सेनोसाइड (गहन अनुकूलनजन्य सहारा)। कार्यक्षमता बढ़ाता है, एकाग्रता सुधारता है, तनाव में अनुकूलित होने में मदद करता है।
- प्रतिऑक्सीकारक सुरक्षा: ऊलोंग के कैटेचिन + जिनसेंग के पॉलीफ़ेनॉल।
- प्रतिरक्षा मजबूत करना: जिन्सेनोसाइड NK-कोशिकाओं और मैक्रोफ़ेज की सक्रियता बढ़ाते हैं। जिनसेंग पॉलीसैक्कराइड – प्रतिरक्षा-नियामक।
- पाचन सहायता: मुलेठी आमाशय की श्लेष्मिका को ढकती है; ऊलोंग पॉलीफ़ेनॉल पाचक रसों को उत्तेजित करते हैं।
- गर्म प्रभाव: पारंपरिक चीनी चिकित्सा (TCM) के अनुसार, जिनसेंग – ‘गर्म’ (温) तत्त्व; ऊलोंग के साथ मिलकर गर्म प्रभाव पैदा करता है, जो ठंड के मौसम में उपयोगी।
- मनःस्थिति में सुधार: कैफ़ीन, L-थीनाइन और जिन्सेनोसाइड का संयोजन हल्का अवसादरोधी प्रभाव डालता है।
चेतावनी: वास्तविक लाभ सच्चे जिनसेंग की मात्रा पर निर्भर करता है। वह चाय जिसमें जिनसेंग की जगह मुलेठी हो, अनुकूलनजन्य गुण नहीं रखती।
9. चाय बनाना:
- तापमान: 85–95°C. निम्न तापमान (85°C) – नाज़ुक आधार ऊलोंग वाले ताइवानी संस्करणों के लिए; उच्च तापमान (95°C) – घने जड़ी-बूटी आवरण वाले फ़ुज़ियान संस्करणों के लिए।
- चाय की मात्रा: 5–7 ग्रा. प्रति 150 मि.ली.।
- बर्तन: चीनी मिट्टी की गाइवान (तटस्थ पदार्थ जड़ी-बूटी की सुगंध नहीं सोखता)। इशिंग चायदानी अनुशंसित नहीं – मिट्टी जिनसेंग की विशिष्ट गंध सोख लेगी, जिसे हटाना असंभव होगा।
- प्रक्रिया:
- बर्तन गरम करें।
- धुलाई प्रवाह: पानी डालें, 10 सेकंड रखें, उड़ेल दें। यह प्रवाह चूर्ण की परत को ‘नरम’ करता है।
- पहला प्रवाह: 30–45 सेकंड। जिनसेंग-मुलेठी प्रोफ़ाइल हावी रहती है।
- दूसरा–तीसरा प्रवाह: 20–30 सेकंड। जड़ी-बूटी की परत धुल जाती है, आधार ऊलोंग प्रकट होता है।
- चौथा–छठा प्रवाह: 40–60 सेकंड। शुद्ध ऊलोंग चरित्र।
- 5–7 प्रवाहों तक टिकता है; अंतिम प्रवाह – हल्का, मीठा अर्क, हल्के जिनसेंग ‘गूँज’ के साथ।
10. भंडारण:
- वायुरोधी अपारदर्शी पात्र, सूखी ठंडी जगह (15–25°C), बाहरी गंधों से दूर।
- भंडारण अवधि – 12–18 महीने। समय के साथ जड़ी-बूटी की सुगंध कमजोर हो जाती है, और आधार ऊलोंग का चरित्र ‘मंद’ पड़ सकता है।
- रेफ़्रिजरेटर अनुशंसित नहीं (संघनित जल जड़ी-बूटी की परत को भिगो सकता है)।
- मसालों, कॉफ़ी के पास न रखें – जड़ी-बूटी की परत सक्रिय रूप से गंध सोखती है।
11. मूल्य और नकली उत्पाद:
मूल्य पदानुक्रम:
- सस्ता फ़ुज़ियान (मुलेठी >> जिनसेंग): $3–8 प्रति 100 ग्रा.
- मध्यम गुणवत्ता फ़ुज़ियान (मुलेठी + जिनसेंग): $8–15 प्रति 100 ग्रा.
- ताइवानी (असली जिनसेंग, गुणवत्ता ऊलोंग): $20–50+ प्रति 100 ग्रा.
असली जिनसेंग को मुलेठी से कैसे अलग करें:
- पहले प्रवाह का स्वाद: जिनसेंग – कड़वा-मसालेदार, ‘मिट्टी जैसा’; मुलेठी – अति मीठी, बिना कड़वाहट। यदि पहला प्रवाह केवल मीठा है – जिनसेंग बहुत कम है।
- चूर्ण की परत का रंग: जिनसेंग – बेज-भूरा; मुलेठी – अधिक हल्का, पीलापन लिए।
- पैकेट पर संरचना: ईमानदार उत्पादक जिनसेंग प्रतिशत दर्शाते हैं। ‘甘草’ (गान्चाओ, मुलेठी) का पहले सूचीबद्ध होना मुलेठी की प्रधानता का निश्चित संकेत है।
- मूल्य: वास्तविक जिनसेंग सामग्री वाली सच्ची रेनशेन ऊलोंग $3–5 प्रति 100 ग्रा. की नहीं हो सकती – केवल जिनसेंग चूर्ण ही उससे महँगा है।
- बाद का स्वाद: असली जिनसेंग मुँह में एक विशिष्ट ‘चुभने जैसी’ शीतलता छोड़ता है (शेंगजिन, 生津); मुलेठी – केवल मिठास।
12. रोचक तथ्य:
- रेनशेन ऊलोंग स्वयं चीन की तुलना में रूस और सीआईएस देशों में कहीं अधिक लोकप्रिय है; ताइवान में यह ‘कार्यात्मक चायों’ की एक संकीर्ण जगह रखती है।
- ‘लैन गुई रेन’ (兰贵人, ‘कुलीन आर्किड’) नाम – विशुद्ध विपणन है; चाय का आर्किड से कोई संबंध नहीं।
- रेनशेन ऊलोंग का एक दाना भार अनुसार 40% तक जड़ी-बूटी चूर्ण हो सकता है – यह विश्व की सबसे ‘अ-चाय’ चायों में से एक है।
- दक्षिण-पूर्व एशिया (मलेशिया, सिंगापुर) में रेनशेन ऊलोंग को बर्फ़ के साथ ठंडा करके परोसा जाता है – एक टॉनिक ग्रीष्म पेय के रूप में।
- मुलेठी का ग्लाइसीर्राइज़िन बड़ी मात्रा में (>50 ग्रा. मुलेठी/दिन) द्रव प्रतिधारण और रक्तचाप बढ़ा सकता है – उच्च रक्तचाप वाले लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण।
13. जिनसेंग बनाम मुलेठी: मुख्य अंतर:
| पैरामीटर | असली जिनसेंग (人参) | मुलेठी (甘草) |
|---|---|---|
| लैटिन नाम | Panax ginseng / P. quinquefolius | Glycyrrhiza glabra / G. uralensis |
| प्रमुख पदार्थ | जिन्सेनोसाइड (Rb1, Rg1) | ग्लाइसीर्राइज़िन |
| स्वाद | कड़वा-मसालेदार, ‘मिट्टी जैसा’, ‘चुभन’ के साथ | तीव्र मीठा, बिना कड़वाहट |
| मुख्य प्रभाव | अनुकूलनजन्य, टॉनिक, प्रतिरक्षा-नियामक | सूजनरोधी, कफ़निस्सारक, मधुरक |
| चूर्ण का मूल्य (कि.ग्रा.) | $50–200+ | $5–15 |
| सस्ते संस्करणों में अंश | 0–10% | 60–90% |
बाज़ार में अधिकांश रेनशेन ऊलोंग में मुख्य रूप से मुलेठी होती है, जिसमें न्यूनतम जिनसेंग या बिल्कुल नहीं होता। इससे चाय ‘खराब’ नहीं हो जाती – मुलेठी के अपने उपयोगी गुण हैं – किन्तु यह समझना महत्त्वपूर्ण है कि आप किसके लिए भुगतान कर रहे हैं।
14. संभावित मतभेद:
- उच्च रक्तचाप: मुलेठी का ग्लाइसीर्राइज़िन नियमित सेवन से रक्तचाप बढ़ा सकता है। उच्च रक्तचाप वाले लोगों को सेवन सीमित करना चाहिए।
- कैफ़ीन के प्रति अतिसंवेदनशीलता: अनिद्रा, तीव्र हृदयगति, घबराहट।
- गर्भावस्था और स्तनपान: जिनसेंग – प्रबल टॉनिक, गर्भवतियों के लिए अनुशंसित नहीं। चिकित्सक से परामर्श अनिवार्य।
- स्वप्रतिरक्षी रोग: जिनसेंग की प्रतिरक्षा-उत्तेजक क्रिया अवांछनीय हो सकती है।
- एंटीकोगुलेंट, हाइपोग्लाइसीमिक दवाओं का सेवन: जिनसेंग उनके प्रभाव को बढ़ा सकता है। चिकित्सक से परामर्श।
- व्यक्तिगत असहनशीलता: जिनसेंग/मुलेठी, साथ ही आवरण के बांधक घटकों पर प्रतिक्रिया संभव है।
अंत में:
रेनशेन ऊलोंग एक अनूठे, किसी अन्य से अलग चरित्र वाली चाय है: इसके घने, ‘चमकीले’ दाने प्रवाह दर प्रवाह खुलते हैं, धीरे-धीरे जड़ी-बूटी का आवरण त्यागते और ऊलोंग का आधार प्रकट करते हैं। पहली चुस्कियाँ – जिनसेंग और मुलेठी की मसालेदार मिठास; अंतिम – ऊलोंग की शुद्ध पुष्पीयता और तैलीयता। यही विपरीतता चाय को रोचक बनाती है। मुख्य बात – सचेत चयन: सच्चे जिनसेंग और मुलेठी के बीच अंतर समझना, विपणन कथाओं के लिए अधिक भुगतान न करना और अपने चायदानी के योग्य आधार ऊलोंग की गुणवत्ता चुनना। जो टॉनिक प्रभाव को सराहते हैं और ‘औषधीय’ नोटों से नहीं डरते – उनके लिए रेनशेन ऊलोंग कार्यदिवसों और ठंडी शामों का एक वफ़ादार साथी बनेगा।