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जिंग शान चा
Jìng shānchá · 径山茶
जिंग शान चा (径山茶, Jìngshān Chá) — हांगझोउ के निकट जिंगशान पर्वत से आने वाली एक ऐतिहासिक हरी चाय है, जिसका वैश्विक चाय संस्कृति में अद्वितीय महत्व है: यहीं पर ‘जिंगशान चाय समारोह’ (径山茶宴, Jìngshān cháyàn) उत्पन्न हुआ, जिसे 13वीं शताब्दी में जापानी भिक्षु अपने द्वीपसमूह में ले गए, और जिसने जापानी चाय समारोह (茶道, Chadō)…
जिंग शान चा (径山茶, Jìngshān Chá) — हांगझोउ के निकट जिंगशान पर्वत से आने वाली एक ऐतिहासिक हरी चाय है, जिसका वैश्विक चाय संस्कृति में अद्वितीय महत्व है: यहीं पर ‘जिंगशान चाय समारोह’ (径山茶宴, Jìngshān cháyàn) उत्पन्न हुआ, जिसे 13वीं शताब्दी में जापानी भिक्षु अपने द्वीपसमूह में ले गए, और जिसने जापानी चाय समारोह (茶道, Chadō) की नींव रखी। जिंगशान पर्वत वह स्थान बन गया जहाँ ‘चाय संत’ लू यू (陆羽, Lù Yǔ) ने एकांतवास में वर्षों बिताते हुए ‘चाय कैनन’ (茶经, Chá Jīng) — दुनिया का पहला चाय ग्रंथ — पर कार्य किया।
1. वर्गीकरण और उत्पत्ति:
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प्रकार: हरी चाय (अकिण्वित)। आकार की दृष्टि से — मुड़ी हुई ‘माओ फेंग’ (毛峰) बनावट, जिसमें पत्ती विशिष्ट रूप से लिपटी होती है। तकनीकी रूप से — कड़ाही-भूनाई और ताप-सुखाने का संयोजन (炒烘结合, chǎo hōng jiéhé)।
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श्रेणी: ‘झेजियांग प्रांत की दस प्रसिद्ध चायों’ (浙江省十大名茶) में से एक। एक ऐतिहासिक चाय, जिसकी जड़ें तांग राजवंश (8वीं शताब्दी) में हैं और जो सोंग काल (10वीं–13वीं शताब्दी) में प्रसिद्ध हुई। शास्त्रीय मुड़ी हुई हरी चाय के अलावा, आज ‘जिंग शान चा’ ब्रांड के अंतर्गत नियानचा (碾茶, niǎnchá — माचा उत्पादन के लिए भाप में पकाई गई चाय) और स्वयं माचा (抹茶, mǒchá) का भी उत्पादन होता है — जो तांग-सोंग परंपरा की प्रत्यक्ष विरासत है।
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उत्पत्ति: चीन, झेजियांग प्रांत (浙江, Zhèjiāng), हांगझोउ शहर (杭州, Hángzhōu), युहांग जिला (余杭区, Yúháng Qū)। उत्पादन क्षेत्र में युहांग जिले के जिंगशान (径山镇), युहांग (余杭), शियानलिन (闲林), झोंगताई (中泰) कस्बों के साथ-साथ पड़ोसी शहर लिनआन (临安市) के हेंगबान (横板) और गाओहोंग (高虹) कस्बे शामिल हैं।
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टेरुआर का केंद्र: जिंगशान कस्बे का जिंगशान गाँव (径山村, Jìngshān Cūn), विशेष रूप से लिंगशियाओफेंग चोटी (凌霄峰) की ढलानें और सीबियाउ क्षेत्र (四壁坞)।
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भौगोलिक निर्देशांक: लगभग 30°24′ उत्तरी अक्षांश, 119°51′ पूर्वी देशांतर।
2. इतिहास और सांस्कृतिक महत्व:
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इतिहास: जिंगशान पर्वत पर चाय की खेती 742 ईसवी (तांग राजवंश, तियानबाओ काल, 天宝) से शुरू होती है, जब चान बौद्ध भिक्षु फ़ाचिन (法钦禅师, Fǎqīn Chánshī) ने पर्वत की चोटी पर जिंगशानसी मठ (径山寺, Jìngshān Sì) की स्थापना की और बुद्ध को अर्पित करने के लिए चाय की झाड़ियाँ लगाईं। मठ शीघ्र ही चीन के सबसे बड़े चान (ज़ेन) केन्द्रों में से एक बन गया — सोंग राजवंश में इसे ‘स्वर्ग के नीचे पाँच महान चान मठों में प्रथम निवास’ (天下禅林之冠) की उपाधि प्राप्त थी।
‘चाय संत’ लू यू ने अपने जीवन का एक बड़ा भाग जिंगशान पर्वत पर एकांत में बिताया, जहाँ उन्होंने अपने महान ग्रंथ ‘चाय कैनन’ (茶经) पर काम किया। लू यू का जिंगशान से जुड़ाव — विश्व चाय अध्ययन के इतिहास के प्रमुख तथ्यों में से एक है।
चाय ने सोंग राजवंश (960–1279) के दौरान सर्वोच्च उत्कर्ष प्राप्त किया, जब जिंगशानसी मठ में एक अनूठी परंपरा विकसित हुई — ‘जिंगशान चाय समारोह’ (径山茶宴, Jìngshān cháyàn)। यह चाय बनाने और अर्पित करने की एक अनुष्ठानिक प्रक्रिया थी: पाउडर चाय (末茶, mòchá) को एक कटोरे में बाँस की फेंटनी (茶筅, cháxiǎn) से फेंटा जाता था — यह तकनीक जापानी तेनचा (点茶, diǎnchá) से अप्रभेद्य थी। जिंगशानसी में अध्ययनरत जापानी ज़ेन भिक्षुओं ने इस समारोह को अपनाया और जापान ले गए, जहाँ यह जापानी चाय समारोह (茶道, Chadō / Sadō) में रूपांतरित हो गया। इस प्रकार, जिंगशान पर्वत — ‘जापानी चाय समारोह का पालना’ माना जाता है।
चिंग राजवंश के बाद चाय का पतन हो गया। 1978 में पुनरुत्थान शुरू हुआ, जब स्थानीय कारीगरों ने ऐतिहासिक विधियों के अनुसार उत्पादन बहाल किया। हाल के वर्षों में जिंगशान पर नियानचा (碾茶) और माचा का उत्पादन भी पुनर्जीवित किया गया है — जो चीनी उद्गम को जापानी परंपरा से जोड़ने वाले ऐतिहासिक चक्र को पूर्ण करता है।
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नाम:
- ‘जिंगशान’ (径山) — ‘पगडंडी-पर्वत’ — युहांग जिले में तियानमुशान पर्वतमाला (天目山, Tiānmùshān) के उत्तर-पूर्वी छोर पर स्थित पर्वत श्रृंखला का नाम।
- ‘चा’ (茶) — ‘चाय’।
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सांस्कृतिक महत्व: जिंग शान चा — एक ऐसी चाय है जिसका सभ्यतागत महत्व पाककला से कहीं आगे तक जाता है। यह:
- वह स्थान है जहाँ लू यू ने ‘चाय कैनन’ — विश्व चाय संस्कृति के मूलभूत ग्रंथ — पर कार्य किया;
- ‘जिंगशान चाय समारोह’ की जन्मस्थली है — जो जापानी चाय समारोह का प्रत्यक्ष पूर्वज है;
- सोंग काल के पाँच महान चान मठों में से एक है — वह आध्यात्मिक केन्द्र जहाँ चाय और ध्यान ‘चा चान यी वेई’ (茶禅一味, ‘चाय और ज़ेन — एक स्वाद’) के दर्शन में संयुक्त हो गए।
3. वानस्पतिक विवरण और कच्ची सामग्री:
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किस्म / कल्टीवार: जिंग शान चा के उत्पादन के लिए विशेष स्थानीय कल्टीवारों और अनुकूलित बाह्य किस्मों Camellia sinensis var. sinensis दोनों का उपयोग किया जाता है:
- जिंगशान 1 और जिंगशान 2 (径山1号、径山2号) — कृषि मंत्रालय द्वारा पंजीकृत किस्में, जो विशेष रूप से जिंगशान पर्वत की परिस्थितियों के लिए विकसित की गई हैं। इनकी विशेषता स्थिर सुगंध प्रोफ़ाइल, प्रचुर रोमिलता और बढ़ी हुई उपज (मानक से 20–30% अधिक) है।
- लोंगजिंग 43 (龙井43), झेनोंग 113 (浙农113), चिउकेंग चुन्टीचोंग (鸠坑群体种) — स्थानीय जलवायु और तकनीक के अनुकूल ये सफल किस्में हैं।
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तुड़ाई: प्रारंभिक वसंत तुड़ाई। विशेष श्रेणी प्रथम स्तर (特级一等) के लिए — एक कली और बमुश्किल खुली एक पत्ती (一芽一叶初展), प्ररोह की लंबाई 2–2.5 सेमी। प्रथम श्रेणी के लिए — एक कली और एक-दो पत्तियाँ, 2.5–3 सेमी। द्वितीय श्रेणी के लिए — एक कली और एक-दो पत्तियाँ, 3–3.5 सेमी।
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तुड़ाई मानक: छह श्रेणियाँ: तीन स्तरों वाली विशेष श्रेणी (特级一、二、三等) और तीन मानक ग्रेड (一级、二级、三级)। कच्ची सामग्री ताज़ी, कोमल, रोगग्रस्त पत्तियों और क्षति से मुक्त होनी चाहिए।
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कच्ची सामग्री की आवश्यकताएँ: कोमल, एकसमान प्ररोह। नियानचा (碾茶) के लिए छाया-कृषि (覆下栽培, fù xià zāipéi) से गुज़री चाय की झाड़ियों की सामग्री का उपयोग किया जाता है — जापानी ‘काबुसे’ तकनीक के अनुसार, जो अमीनो अम्ल और क्लोरोफिल की मात्रा बढ़ाती है।
4. टेरुआर और कृषि संबंधी विशेषताएँ:
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स्थलाकृति और अवस्थिति: जिंगशान पर्वत — तियानमुशान पर्वतमाला का उत्तर-पूर्वी छोर। चाय बागान 560 मीटर और उससे अधिक ऊँचाई पर, कोमल ढलानों पर स्थित हैं, जो बाँस और शंकुधारी वनों से घिरे हैं। ‘बाँस के वन में चाय’ (竹木共生, zhú mù gòngshēng) का पारिस्थितिकी तंत्र — टेरुआर की विशिष्ट पहचान है।
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जलवायु: पर्वत की चोटियाँ लगभग निरंतर बादलों और कोहरे में लिपटी रहती हैं। दैनिक तापमान का अंतर — महत्वपूर्ण है, जो युवा प्ररोहों में अमीनो अम्लों के संचय में सहायक होता है। वार्षिक वर्षा — 1400 मिमी से अधिक। उच्च आर्द्रता के साथ प्रचुर विसरित प्रकाश (漫射光) कोमल हरी चायों के उत्पादन के लिए आदर्श स्थितियाँ निर्मित करते हैं।
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मृदा: अम्लीय लाल या पीली मृदाएँ (红壤 / 黄壤) जिनका pH 4.5–6.0, गहरी परिच्छेदिका, उच्च कार्बनिक पदार्थ सामग्री। बाँस और शंकुधारी वृक्षों की पत्तियों का कचरा मृदा को समृद्ध करता है, जिससे एक शक्तिशाली ह्यूमस क्षितिज बनता है।
5. उत्पादन तकनीक:
शास्त्रीय मुड़ी हुई जिंग शान चा का उत्पादन कड़ाही-भूनाई (炒) और ताप-सुखाने (烘) का संयोजन करता है, जो सघन आकृति और स्थायी पुष्प-सुगंध के बीच संतुलन सुनिश्चित करता है।
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फैलाना और मुरझाना (摊放 — tānfàng): ताज़ी तोड़ी गई सामग्री को ठंडे कमरे में 6–12 घंटों के लिए पतली परत में फैलाया जाता है। इस दौरान अतिरिक्त नमी निकल जाती है, सुगंध-अग्रदूत बनने लगते हैं, पत्ती कोमल व लचीली हो जाती है।
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‘हरियाली नष्ट करना’ / स्थिरीकरण (杀青 — shāqīng): 150–170°C पर उच्च-तापमान भूनाई। ऑक्सीकारक एंज़ाइमों के तीव्र निष्क्रियीकरण से हरा रंग और ताज़ी सुगंध स्थिर हो जाती है।
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आकार देना / सीधा करना (理条 — lǐtiáo): तापमान को 80–90°C तक कम करने पर कारीगर हाथ से चाय की पत्तियों को उनकी विशिष्ट हल्की मुड़ी हुई आकृति प्रदान करता है।
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मरोड़ना (揉捻 — róuniǎn): हल्का मरोड़ — न्यूनतम दबाव, ताकि कोमल कलियों और पत्तियों की साबुतता बनी रहे, किंतु भावी निष्कर्षण के लिए पर्याप्त कोशिका-रस निकल सके।
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प्रारंभिक ताप-सुखाना (毛火 — máohuǒ): मध्यम तापमान पर सुखाना, नमी घटाने और आकृति स्थिर करने के लिए।
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अंतिम ताप-सुखाना (足火 — zúhuǒ): धीमी आँच पर कोयले की आँच से सुखाना (文火慢烘, wénhuǒ màn hōng) — सुगंध खिलने का महत्वपूर्ण चरण। यही ‘धीमी आँच’ उस स्थायी चेस्टनट-ऑर्किड गुलदस्ते को आकार देती है, जिसे तीव्र यांत्रिक सुखाने से प्राप्त करना असंभव है।
नियानचा / माचा तकनीक (碾茶 / 抹茶):
शास्त्रीय हरी चाय के समानांतर जिंगशान पर नियानचा का उत्पादन पुनर्जीवित किया गया है — भाप में पकाई गई (蒸青, zhēngqīng) चाय, जो सीधे सोंग परंपरा का अनुसरण करती है: कच्ची सामग्री को तोड़ने से पहले छाया में उगाया जाता है (覆下栽培), भाप द्वारा स्थिर किया जाता है, सुखाकर बारीक पाउडर — माचा — में पीसा जाता है।
6. संवेदी विशेषताएँ:
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सूखी पत्ती का बाहरी स्वरूप: पतले, सघन रूप से मुड़े हुए प्ररोह, विशिष्ट लिपटी हुई आकृति के साथ (细紧卷曲)। रंग — चमकीला पन्ना-हरा (绿翠), प्रचुर चाँदी-जैसे रोमों (显毫) के साथ। उच्च श्रेणियों में — एकसमान, सुडौल, सुरुचिपूर्ण पत्तियाँ।
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सूखी पत्ती की सुगंध: युवा कलियों की कोमल महक (嫩香, nèn xiāng), चेस्टनट की महक (板栗香, bǎnlì xiāng), ऑर्किड का आभास (兰花香, lánhuā xiāng)। सुगंध शुद्ध है, घास-जैसी नहीं।
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इन्फ़्यूज़न की सुगंध: स्थायी, ऊँची, चेस्टनट-ऑर्किड प्रोफ़ाइल के साथ। हर बार पानी डालने पर धीरे-धीरे खुलती है।
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स्वाद: ताज़ा और रसीला (鲜爽, xiānshuǎng), कोमल व हल्का मीठा (甘醇, gānchún), लंबे समय तक लौटती मिठास (回甘, huígān) के साथ। शरीर — मध्यम-सघन, गोलाकार। कसैलापन न्यूनतम है। शास्त्रीय सूत्र: ‘पहली बार डालो — हल्की व शुद्ध, दूसरी — समृद्ध और सुगंधित, तीसरी — कोमल और संतुलित’ (首泡清淡,二泡浓郁,三泡醇和)।
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इन्फ़्यूज़न का रंग: कोमल-हरा, शुद्ध, चमकीला और पारदर्शी (嫩绿莹亮)।
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चाय की तली (भीगी पत्ती): कोमल, साबुत प्ररोह, ‘कलियों’ के रूप में एकत्र (细嫩成朵)। रंग — एकसमान, हल्का-हरा। पत्ती लचीली, जीवंत।
7. रासायनिक संरचना:
उच्च-पर्वतीय उत्पत्ति, सतत कोहरा और बाँस का पारिस्थितिकी तंत्र रासायनिक प्रोफ़ाइल निर्धारित करते हैं:
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पॉलिफ़ेनॉल (कैटेचिन): मध्यम मात्रा — प्रचुर विसरित प्रकाश का परिणाम। कठोर कसैलेपन के बिना स्वाद की हल्की संरचनात्मक गहराई प्रदान करते हैं।
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अमीनो अम्ल (जैसे L-थियेनाइन): बढ़ी हुई मात्रा — ताज़गी, मिठास और ‘उमामी’-सुर का प्रमुख कारक। छाया में उगाई गई सामग्री (नियानचा/माचा) की चाय में अमीनो अम्ल और भी अधिक होते हैं।
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ऐल्केलॉइड: कैफ़ीन — मध्यम मात्रा। थियोब्रोमाइन, थियोफ़िलाइन।
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क्लोरोफिल: छाया-सामग्री में बढ़ी हुई मात्रा — माचा का गहरा हरा रंग सुनिश्चित करती है।
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विटामिन: विटामिन C, B-समूह विटामिन, कैरोटीनॉइड।
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खनिज: पोटैशियम, मैग्नीशियम, ज़िंक, मैंगनीज़ — यह प्रोफ़ाइल बाँस के पत्तों के कचरे से समृद्ध अम्लीय पर्वतीय मृदा द्वारा निर्धारित होती है।
8. लाभकारी गुण:
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टॉनिक प्रभाव एवं मानसिक स्पष्टता (提神醒脑): कैफ़ीन और L-थियेनाइन कोमल, एकाग्र स्फूर्ति प्रदान करते हैं।
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एंटीऑक्सीडेंट कार्य: कैटेचिन और पॉलिफ़ेनॉल मुक्त मूलकों को निष्क्रिय करते हैं।
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प्रतिरक्षा को सुदृढ़ करना (提高免疫力): पॉलिफ़ेनॉल, विटामिन और सूक्ष्म तत्वों का मिश्रण प्रतिरक्षा कार्य का समर्थन करता है।
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पाचन में सुधार (促进消化): पाचक एंज़ाइमों के स्राव को उत्तेजित करता है।
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शीतल और ताज़गी देने वाला प्रभाव (清热消暑): इन्फ़्यूज़न प्यास बुझाता है और आंतरिक गर्मी दूर करता है।
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महत्वपूर्ण: उपरोक्त गुण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आँकड़ों पर आधारित हैं और चिकित्सीय सिफ़ारिशें नहीं हैं।
9. चाय बनाना:
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पानी का तापमान: 80–85°C.
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चाय की मात्रा: 3 ग्राम प्रति 150 मिली पानी (अनुपात 1:50)।
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बर्तन: काँच का गिलास (玻璃杯) — मुड़े हुए प्ररोहों के खुलने और इन्फ़्यूज़न के रंग का अवलोकन करने के लिए।
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प्रक्रिया (तीन विधियाँ चुनें):
- ऊपरी डालना (上投法, shàng tóu fǎ): पहले गिलास में 7/10 मात्रा तक पानी (80–85°C) भरें, फिर चाय डालें। उच्च श्रेणियों के लिए अनुशंसित — इससे पत्तियों को धीरे-धीरे डूबते और खिलते देखा जा सकता है।
- मध्य डालना (中投法, zhōng tóu fǎ): एक तिहाई पानी डालें, चाय डालें, भीगने दें, फिर 7/10 तक पानी और डालें।
- निचला डालना (下投法, xià tóu fǎ): चाय डालें, फिर पानी डालें। दैनिक चाय-पान के लिए शास्त्रीय विधि।
- पहला इन्फ़्यूज़न — 1–2 मिनट।
- बाद में डालने पर — समय बढ़ाएँ। चाय तीन पूर्ण बार डाली जा सकती है।
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ध्यान दें: कसैलापन बढ़ने से बचने के लिए इन्फ़्यूज़न को अधिक देर न रखें। खाली पेट पीने की अनुशंसा नहीं की जाती।
10. भंडारण:
- वायुरोधी बर्तन में, अँधेरी, सूखी व ठंडी जगह पर रखें।
- सर्वोत्तम तापमान — 0–5°C (रेफ़्रिजरेटर), वायुरोधी पैकेजिंग में।
- भंडारण अवधि — 12 महीने तक। सर्वोत्तम स्वाद के लिए — 6 महीने के भीतर उपभोग करें।
- खोलने के बाद — 1–2 महीने के भीतर उपयोग करें।
11. मूल्य और नकली चाय:
जिंग शान चा — बढ़ती लोकप्रियता वाली चाय है, विशेषकर माचा और नियानचा के उत्पादन के पुनरुत्थान के बाद। मूल्य ग्रेड (छह स्तर), तुड़ाई के समय और केन्द्रीय क्षेत्र (लिंगशियाओफेंग, सीबियाउ) की उत्पत्ति पर निर्भर करता है।
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नकली चाय से बचने के उपाय:
- विश्वसनीय विक्रेताओं से खरीदें जो युहांग जिले से उत्पत्ति की पुष्टि कर सकें।
- आकृति का मूल्यांकन करें: प्रचुर रोमों के साथ विशिष्ट मुड़ी हुई ‘माओ फेंग’ आकृति। ढीली, असमान पत्तियाँ — नकली होने का संकेत हैं।
- सुगंध का मूल्यांकन करें: शुद्ध चेस्टनट-ऑर्किड स्वर। पुष्प-जैसे चरित्र का अभाव — संदेह का कारण है।
- इन्फ़्यूज़न की जाँच करें: कोमल-हरा, चमकीला, पारदर्शी।
- कीमत पर ध्यान दें: केंद्रीय क्षेत्र की चाय सस्ती नहीं हो सकती।
12. रोचक तथ्य:
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‘जिंगशान चाय समारोह’ (径山茶宴) — जापानी चाय समारोह का प्रत्यक्ष पूर्वज। 13वीं शताब्दी में जिंगशानसी मठ में अध्ययनरत जापानी ज़ेन भिक्षु पाउडर चाय को बाँस की फेंटनी से फेंटने की तकनीक जापान ले गए, जहाँ वह चादो (茶道) में रूपांतरित हुई।
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लू यू — ‘चाय संत’, ‘चाय कैनन’ (दुनिया का पहला चाय ग्रंथ, 8वीं शताब्दी) के लेखक — ने जिंगशान पर्वत पर वर्षों बिताए, जहाँ उन्होंने अपने ग्रंथ के प्रमुख भाग लिखे। जिंगशान — उन चुनिंदा स्थानों में से है जिनका लू यू से प्रत्यक्ष दस्तावेज़ी संबंध है।
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सोंग राजवंश में जिंगशानसी मठ ‘पाँच महान चान मठों में प्रथम निवास’ (天下禅林之冠) की उपाधि धारण करता था — चान बौद्ध धर्म के पदानुक्रम में यह सर्वोच्च श्रेणी है।
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जिंगशान पर नियानचा (碾茶) और माचा (抹茶) के उत्पादन का पुनरुत्थान — एक ऐतिहासिक विडंबना: 8वीं–13वीं शताब्दियों में यहाँ उत्पन्न तकनीक चीन में लुप्त हो गई, जापान में फूली-फली, और अब अपने जन्मस्थान पर लौट रही है।
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विशेष कल्टीवार जिंगशान 1 और 2 — बहुवर्षीय चयन का परिणाम हैं, जिनका लक्ष्य ऐतिहासिक स्रोतों में वर्णित गुणों को पुनरुत्पादित करना है: प्रचुर रोम, स्थायी सुगंध और उच्च उपज।
13. झेजियांग की अन्य प्रसिद्ध हरी चायों से तुलना:
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शी हू लोंग जिंग (西湖龙井): हांगझोउ का ही एक स्थानीय चाय। चपटी पत्ती, चेस्टनट-बीन जैसी सुगंध। लोंग जिंग — अधिक ‘संरचनात्मक’ और ‘उमामी’-उन्मुख; जिंग शान चा — अधिक मुड़ी हुई, रोमिल, अधिक स्पष्ट ऑर्किड-सुर के साथ।
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आंजी बाई चा (安吉白茶): उत्तरी झेजियांग से। रिकॉर्ड अमीनो अम्ल स्तर वाले अल्बिनो प्ररोहों की हरी चाय। आंजी — ‘शुद्ध मिठास और उमामी’; जिंग शान चा — चेस्टनट चरित्र वाली अधिक शास्त्रीय ‘माओ फेंग’।
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काइहुआ लोंग डिंग (开化龙顶): पश्चिमी झेजियांग से। पुष्प-सुगंध वाली मुड़ी हुई हरी चाय। लोंग डिंग — अधिक हल्की; जिंग शान चा — ऐतिहासिक रूप से गहरी और चान परंपरा से जुड़ी हुई।
निष्कर्षतः:
जिंग शान चा — वह चाय है जो विश्व चाय सभ्यता के बिलकुल उद्गम पर खड़ी है। इसी पर्वत पर लू यू ने ‘चाय कैनन’ लिखा, भिक्षुओं ने वह चाय समारोह रचा जो जापानी चादो का पूर्वज बना, और पाँच महान चान मठों ने ‘चाय और ज़ेन — एक स्वाद’ के सूत्र में चाय को ध्यान से जोड़ा। आज की जिंग शान चा — कोमल, ऑर्किड-चेस्टनट जैसी, रेशमी मिठास लिए — केवल एक पेय नहीं है, बल्कि एक मूर्त धागा है जो हमें एक सहस्राब्दी पुरानी परंपरा से जोड़ता है, जिसमें चाय का एक साधारण कप आत्मज्ञान का मार्ग बन गया।