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बाई माओ हौ
Bái máo hóu · 白毛猴
बाई माओ हौ (白毛猴, bái máo hóu) — "सफ़ेद रोएँदार बंदर" — एक ऐतिहासिक नाम है जो फ़ूज्यान प्रांत के **दो मूलतः भिन्न चायों** को जोड़ता है, इनका केवल एक ही सामान्य नाम "सफ़ेद रोएँदार बंदर" है:
बाई माओ हौ (白毛猴, bái máo hóu) — “सफ़ेद रोएँदार बंदर” — एक ऐतिहासिक नाम है जो फ़ूज्यान प्रांत के दो मूलतः भिन्न चायों को जोड़ता है, इनका केवल एक ही सामान्य नाम “सफ़ेद रोएँदार बंदर” है:
(1) झेंगहे बाई माओ हौ (政和白毛猴) — उत्तरी फ़ूज्यान के झेंगहे काउंटी (政和县) का हरा चाय (绿茶)। इसे चाय व्यापारी फ़ान चांगयी (范昌义) ने 1910 में बनाया था। प्रक्रिया का वर्णन “लाल और हरी चाय के बीच” (介于红茶绿茶之间) के रूप में किया जाता है: लंबे (16–18 घंटे) विल्टिंग (萎凋) के साथ आंशिक किण्वन ऑक्सीकरण, फिर फिक्सेशन, रोलिंग और सुखाना। स्थानीय उपनाम — “白绿” (बाई ल्यू, “सफ़ेद-हरा”)। मूल रूप से गुआंगडोंग, हांगकांग और मकाऊ को निर्यात किया जाता था। कच्चा माल — प्रसिद्ध cultivar झेंगहे दाबाईचा (政和大白茶) — वही जिससे सफ़ेद चाय “झेंगहे बाईहाओ यिन्झेन” बनाई जाती है। झेंगहे उत्तरी सांग काल से सिल्वर नीडल्स के उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है; यही काउंटी सम्राट हुई-ज़ोंग (1111–1118) के शासनकाल के झेंगहे युग को नाम देती है, जिन्होंने कथित रूप से स्थानीय चाय से इतने प्रभावित होकर काउंटी के नाम पर पूरे युग का नाम रख दिया था।
(2) आंसी बाई माओ हौ (安溪白毛猴) — दक्षिणी फ़ूज्यान के आंसी से ऊलोंग चाय (乌龙茶)। शिज़ू पर्वत (石竹岩, 700+ मी) का मूल cultivar, जिसे किंग राजवंश के अंत में भाइयों से जिया और से बिंग (谢驾、谢冰) द्वारा विकसित किया गया। प्रसंस्करण — पूर्ण ऊलोंग किण्वन और “窨制” (यिन ज़ी, अतिरिक्त “सुगंधित करना”) के साथ। इसे “安溪药茶” (“आंसी की औषधीय चाय”) के रूप में जाना जाता था, और ताइवान, जापान, दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप में निर्यात किया जाता था। वर्तमान में यह लगभग विलुप्त हो चुकी है — शिज़ू पर्वत पर केवल 7–8 पुराने पेड़ बचे हैं।
यह लेख झेंगहे बाई माओ हौ (हरी चाय / “सफ़ेद-हरी”) पर केंद्रित है, क्योंकि यह संग्रह में प्रस्तुत है और अधिक सुलभ है। आंसी संस्करण का उल्लेख “तुलना” अनुभाग में किया गया है।
1. वर्गीकरण और उत्पत्ति:
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प्रकार: हरी चाय (绿茶, lǜchá), औपचारिक रूप से अकिण्वित, हालाँकि लंबी विल्टिंग (16–18 घंटे) के साथ — “制法介于红茶绿茶之间” (“लाल और हरी चाय के बीच की प्रक्रिया”)। स्थानीय उपनाम — “白绿” (बाई ल्यू, “सफ़ेद-हरा”)। जोर — “रोएँ का संरक्षण” (保毫, bǎo háo) और “आकार देना” (做形, zuò xíng) पर है।
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श्रेणी: ऐतिहासिक चाय नाम (历史名茶)। 1910 में बनाया गया। इसे “चीन चा जिंग” (《中国茶经》) में हरी चाय के रूप में वर्गीकृत किया गया है, हालाँकि तकनीक में सफ़ेद चाय (लंबी विल्टिंग) और यहाँ तक कि हल्की ऊलोंग (विल्टिंग के दौरान आंशिक ऑक्सीकरण) के तत्व शामिल हैं।
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उत्पत्ति: चीन, फ़ूज्यान प्रांत (福建省), झेंगहे काउंटी (政和县, Zhènghé Xiàn), उत्तरी फ़ूज्यान। झेंगहे, फ़ूडिंग और जियानऊ के साथ फ़ूज्यान की “तीन महान चाय काउंटियों” में से एक है। निर्देशांक: ~27°22′ N, 118°51′ E.
2. इतिहास और सांस्कृतिक महत्व:
- इतिहास: झेंगहे — उत्तरी फ़ूज्यान में प्राचीनतम चाय इतिहास वाली काउंटी। यहाँ सिल्वर नीडल्स (银针) का उत्पादन उत्तरी सांग राजवंश (960–1127) से होता आ रहा है। किंवदंती के अनुसार, सम्राट हुई-ज़ोंग (宋徽宗, 1100–1126), कला के प्रसिद्ध संरक्षक और ग्रंथ “दा गुआन चा लुन” (《大观茶论》, “दा गुआन युग की चाय पर चर्चा”) के लेखक, इस काउंटी की सफ़ेद चाय से इतने मोहित हुए कि 1115 में उन्होंने अपने शासनकाल का नाम बदलकर “झेंगहे” (政和, “शासन की सद्भावना”) रख दिया — काउंटी के नाम पर। यह चीनी इतिहास के उन दुर्लभ अवसरों में से एक है जब किसी शासक ने चाय के सम्मान में अपने युग का नाम रखा।
इस सदियों पुरानी चाय नींव पर 1910 में स्थानीय चाय व्यापारी फ़ान चांगयी (范昌义, Fàn Chāngyì) ने एक नया प्रकार बनाया — बाई माओ हौ। फ़ान ने एक अनूठी तकनीक विकसित की जो सफ़ेद चाय की लंबी विल्टिंग (16–18 घंटे) को हरी चाय की “हरी को मारने” (杀青) के साथ जोड़ती है। परिणाम — “लाल और हरी के बीच” एक चाय, जिसमें रोएँदार, मुड़े हुए “सिकुड़े बंदर” का आकार और कोमल, “शुद्ध-सुगंधित” (香清味醇) स्वाद है। बाई माओ हौ ने शीघ्र ही गुआंगडोंग, हांगकांग और मकाऊ के बाज़ार जीत लिए — ऐसे क्षेत्र जो रोएँदार, “毫” चायों की सराहना करते थे।
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नाम: 白毛 (Bái Máo) — “सफ़ेद रोएँ” (कलियों और नई पत्तियों पर प्रचुर सफ़ेद रोएँ); 猴 (Hóu) — “बंदर”। मुड़ी हुई, सफ़ेद रोएँ से सघन रूप से ढकी चाय की पत्तियाँ एक सिकुड़े हुए बंदर की याद दिलाती हैं। स्थानीय उपनाम — “白绿” (“सफ़ेद-हरा”) — तकनीक के मध्यवर्ती चरित्र को दर्शाता है। विशेष रूप से उत्कृष्ट बैचों को “王” (वांग, “राजा”) प्रत्यय मिलता है।
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सांस्कृतिक महत्व: बाई माओ हौ — एक “संकर” चाय: यह उस काउंटी में जन्मी जिसने सांग के पूरे युग को नाम दिया, सफ़ेद और हरी चाय की परंपराओं के मिलन बिंदु पर। इसकी तकनीक — “लाल और हरी के बीच” — फ़ूज्यान की प्रयोगशीलता की भावना को दर्शाती है, जिसने चीनी चाय की सभी छह श्रेणियों को जन्म दिया।
3. वानस्पतिक विवरण और कच्चा माल:
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किस्म/कल्टीवार: झेंगहे दाबाईचा (政和大白茶, Zhènghé Dàbáichá) — “झेंगहे की बड़ी सफ़ेद चाय”। फ़ूज्यान के सबसे मूल्यवान कल्टीवारों में से एक: बड़ी, मांसल कलियाँ और पत्तियाँ, जो प्रचुर सफ़ेद रोएँ से ढकी होती हैं। झाड़ीदार प्रकार (灌木型), मध्यम-पत्ती श्रेणी (中叶类), मध्यम-मौसमी (中芽种)। इसी किस्म से प्रसिद्ध सफ़ेद चाय “झेंगहे बाईहाओ यिन्झेन” (政和白毫银针) और “झेंगहे बाई मुदान” (政和白牡丹) बनाई जाती है।
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तुड़ाई: किंगमिंग के बाद (清明后), वसंत ऋतु। मानक — एक कली + दो-तीन नई पत्तियाँ (一芽二三叶), जो सफ़ेद रोएँ से घनीभूत हों। केवल अक्षत प्ररोहों को सूखे मौसम में तोड़ा जाता है। प्ररोह बड़े, “肥壮” (फ़ेईझुआंग, “मांसल और मज़बूत”) होने चाहिए।
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कच्चे माल की आवश्यकताएँ: रोएँ को बिलकुल क्षतिग्रस्त नहीं करना चाहिए — “保毫” (बाओ हाओ, “रोएँ का संरक्षण”) — मुख्य सिद्धांत। प्ररोहों को बाँस की टोकरियों में ढीली परत में रखा जाता है, दबाव से बचाते हुए।
4. टेरॉयर और खेती की विशेषताएँ:
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उगाने की ऊँचाई: 600–900 मी (उत्तरी फ़ूज्यान का पहाड़ी क्षेत्र)। झेंगहे काउंटी वुई पर्वत प्रणाली (武夷山脉) की शाखाओं में, फ़ूज्यान और झेजियांग के संधि स्थल पर स्थित है — प्रांत की सबसे “पहाड़ी” चाय उगाने वाली काउंटियों में से एक।
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जलवायु: उपोष्णकटिबंधीय मानसूनी। औसत वार्षिक तापमान — लगभग 18 °C. वार्षिक वर्षा — 1600–1800 मिमी। उच्च आर्द्रता, बार-बार कोहरा — वर्ष में 180 दिन से अधिक। महत्वपूर्ण दैनिक तापमान अंतर (>8 °C) — अमीनो एसिड और सुगंधित पदार्थों के संचय को प्रोत्साहित करता है। बादलों से फैली हुई रोशनी — झेंगहे दाबाईचा की प्ररोहों पर प्रचुर रोएँ सुनिश्चित करने वाले प्रमुख कारकों में से एक।
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मिट्टी: लाल-पीली (红壤, 黄壤), अम्लीय (pH 4.5–5.5)। अच्छी जल निकासी वाली, गहरी (>60 सेमी), कार्बनिक पदार्थों और खनिजों से भरपूर। मूल चट्टान — ग्रेनाइट और बलुआ पत्थर, जो स्वाद की खनिजीय “हड्डीदार” संरचना प्रदान करते हैं। उत्तरी फ़ूज्यान की पहाड़ी पट्टी की विशिष्ट — वही मिट्टी जिस पर वुई पर्वत की शैल ऊलोंग उगती हैं, हालाँकि ऊँचाई और सूक्ष्म जलवायु भिन्न हैं।
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पारिस्थितिकी: झेंगहे — उच्च वन आवरण (>70%) वाली पहाड़ी काउंटी। बाँस के उपवन, चीड़ और पतझड़ी वन चाय बागानों के ऊपर “हरित छाद” बनाते हैं। जल संसाधन — मिंजियांग बेसिन की धाराएँ और नदियाँ। पहाड़ी क्षेत्र में उद्योग का अभाव।
5. उत्पादन तकनीक:
बाई माओ हौ की तकनीक — एक अनूठा “संकर”, जो सफ़ेद, हरी और आंशिक रूप से लाल चाय के तत्वों को मिलाता है। मुख्य सिद्धांत: “保毫” (रोएँ का संरक्षण) और “做形” (“बंदर” का आकार देना)। “आंतरिक गुणवत्ता उचित विल्टिंग पर निर्भर करती है” (内质重萎凋适度) — प्रमुख सूत्र।
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विल्टिंग (萎凋, wěidiāo): 16–18 घंटे — मानक हरी चाय (2–4 घंटे) की तुलना में काफ़ी लंबा। पत्तियाँ पतली परत में बाँस की ट्रे या “水筛” (शुईशाई, “जल छलनी”) पर छाया में या हवादार कमरे में फैलाई जाती हैं। 16–18 घंटों में पॉलीफेनॉल का आंशिक किण्वित ऑक्सीकरण होता है: नमी की हानि — 25–30%, पत्तियाँ गहरे हरे रंग की हो जाती हैं, डंठल सिकुड़ जाते हैं, रोएँ “चाँदी की तरह” प्रकट होते हैं (白毫显露, 毫毛如银), बनावट — “कपास की तरह मुलायम” (叶质柔软如棉), डंठल मुड़ता है पर टूटता नहीं (梗折不脆断)। अति-विल्टिंग → लालिमा; अल्प-विल्टिंग → अत्यधिक “हरी” कड़वाहट।
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हरी को मारना (杀青, shāqīng): कड़ाही में 140–150 °C पर। पहले “उछालना” (扬炒, yáng chǎo), फिर “बंद” भूनना (闷炒, mèn chǎo)। रंग “青” (क़िंग, नीला-हरा) में बदलने तक, डंठल — पीले-हरे, सुगंध — “清香” (शुद्ध), बिना घास जैसी गंध के।
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रोलिंग-आकार देना (揉捻/做形): अनूठा चरण — “बंदर” का रोलिंग और आकार संयुक्त रूप से। कारीगर बारी-बारी से “लपेटना” (揉搓, róucuō) और “गोले का घुमाना” (茶团旋转, chá tuán xuánzhuǎn): पत्ती गोल, मुड़े हुए आकार में बदल जाती है, जो “सिकुड़े बंदर” की याद दिलाती है। संक्रिया — “हल्की और सावधानीपूर्ण, रोएँ पर ध्यान देते हुए” (操作轻巧,注意保毫)। 5–8 मिनट। नम “चाय के गोले” (湿茶团) — प्रत्येक 50–500 ग्राम।
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प्रारंभिक सुखाना (初烘): 100–110 °C. प्रत्येक “焙笼” (बेइलुंग, बाँस की सुखाने की टोकरी) पर — 10–15 छोटे “चाय के गोले”। 50–60% सूखने तक (पत्तियाँ उँगलियों से चिपकती नहीं)।
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पुनः सुखाना-आकार देना (复焙整形): 50–60 °C. साथ ही आकार देना जारी रहता है: पत्तियाँ “छोटे बंदर” (小猴) के पूर्ण आकार में “निर्मित” होती हैं। रोएँ झड़ने नहीं चाहिए (तापमान बहुत ऊँचा न हो), और रंग पीला-भूरा न हो जाए (तापमान बहुत कम न हो)। 80–90% सूखने पर — 40–50 °C तक कम करें। पूर्ण तैयारी तक सुखाना।
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चयन (拣剔): डंठल और दोषपूर्ण पत्तियाँ हटाना। पैकेजिंग।
6. संवेदी विशेषताएँ:
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सूखी पत्ती का बाहरी रूप: बड़ी, मुड़ी हुई पत्तियाँ, “सिकुड़े बंदर” (犹如毛猴静伏, “जैसे कोई बंदर चुपचाप बैठा हो”)। चाँदी-सफ़ेद रोएँ से सघन रूप से ढकी। आकार — त्रिविमीय, “肥壮卷曲” (फ़ेईझुआंग जुआनक्यु, “मांसल और मुड़ी हुई”)। रंग — चाँदी-हरे से गहरे हरे तक, चाँदी जैसी “पाले” के साथ।
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सुगंध: “रोएँदार” (毫香, háo xiāng) — ताज़गी भरी, हल्की मीठी। शुद्ध (清香)। सामान्य हरी चाय से अधिक जटिल — लंबी विल्टिंग के कारण “दूधिया” और “शहद जैसे” स्वरों के साथ।
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स्वाद: कोमल, “醇和微甘” (चुन्हे वेईगान, “सामंजस्यपूर्ण-कोमल, हल्का मीठा”)। न्यूनतम कसैलापन। स्पष्ट “回甘” (लौटने वाली मिठास)। शरीर — मध्यम, “मखमली”।
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रंग: “清绿泛黄” (क़िंगल्यू फ़ानहुआंग, “शुद्ध-हरा, पीलेपन की ओर”)। कुछ स्रोतों में — “橙黄” (चेंगहुआंग, “अम्बर-पीला”) — यह विल्टिंग की मात्रा पर निर्भर करता है।
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चाय की पत्ती का तल: कोमल, साबुत, लचीला, चमकीला हरा (嫩绿、完整、匀净、无杂)। प्ररोह अपना आकार बनाए रखते हैं — “保毫” और सावधानीपूर्ण प्रसंस्करण का संकेत।
7. रासायनिक संघटन:
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पॉलीफेनॉल (茶多酚): मध्यम — लंबी विल्टिंग (16–18 घंटे) कैटेचिन को आंशिक रूप से ऑक्सीकृत करती है, कसैलापन कम करती है। पॉलीफेनॉल स्तर में बाई माओ हौ मानक हरी चाय (20–30%) की तुलना में सफ़ेद चाय (15–20%) के अधिक निकट है।
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अमीनो एसिड (氨基酸): उच्च — झेंगहे दाबाईचा, फ़ूज्यान के सबसे “अमीनो एसिड-युक्त” कल्टीवारों में से एक, + पर्वतीय टेरॉयर (कोहरा >180 दिन, दैनिक अंतर >8 °C) = समृद्ध अमीनो एसिड प्रोफ़ाइल। L-थिएनिन प्रमुख है — विशिष्ट “रेशमी” मिठास और “毫香” (रोएँदार सुगंध) के लिए उत्तरदायी।
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EGCG: मौजूद है, लेकिन अधिक “कोमल” रूप में — 16–18 घंटे की विल्टिंग के दौरान आंशिक ऑक्सीकरण EGCG के एक भाग को थियाफ़्लेविन और थियारुबिगिन में परिवर्तित करता है, जो शुद्ध हरी चाय के लिए असामान्य “दोहरी” एंटीऑक्सीडेंट प्रोफ़ाइल बनाता है।
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कैफ़ीन: मध्यम।
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विटामिन: C, समूह B।
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खनिज: फ़्लोरीन, पोटैशियम, मैग्नीशियम, ज़िंक।
8. लाभकारी गुण:
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एंटीऑक्सीडेंट सुरक्षा: पॉलीफेनॉल + EGCG + विटामिन C। लंबी विल्टिंग कैटेचिन को आंशिक रूप से थियाफ़्लेविन में परिवर्तित करती है, जो “दोहरी” एंटीऑक्सीडेंट प्रोफ़ाइल (हरी + आंशिक रूप से ऑक्सीकृत) प्रदान करती है।
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कोमल टॉनिक प्रभाव: कैफ़ीन + L-थिएनिन — बिना घबराहट के स्फूर्ति। विशेष रूप से कोमल — कम पॉलीफेनॉल और उच्च अमीनो एसिड के कारण।
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पाचन में सहायता: मध्यम कैटेचिन जठरांत्र गतिशीलता को उत्तेजित करते हैं, श्लेष्मा झिल्ली को बिना परेशान किए (अधिक “तेज़” हरी चायों के विपरीत)।
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संज्ञानात्मक कार्य: L-थिएनिन मस्तिष्क की अल्फ़ा तरंग गतिविधि को उत्तेजित करता है।
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महत्वपूर्ण: सूचीबद्ध गुण सामान्य आँकड़ों पर आधारित हैं और चिकित्सीय सलाह नहीं हैं।
9. चाय बनाना:
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पानी का तापमान: 75–80 °C. कोमल “बंदर” उबलते पानी के प्रति संवेदनशील होते हैं — रोएँ “उबल जाते हैं” और अर्क को धुँधला कर देते हैं।
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चाय की मात्रा: 3–5 ग्राम प्रति 150–200 मिली।
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बर्तन: काँच का गिलास या चीनी मिट्टी का गाइवान — “बंदरों” के खिलने और चाँदी जैसे रोएँ को पानी में देखने के लिए।
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प्रक्रिया:
- बर्तन को गर्म करें।
- चाय डालें।
- धुलाई — पानी डालें, 3 सेकंड बाद छान लें। बाई माओ हौ के लिए धुलाई अनुशंसित है — यह त्रिविमीय मुड़े “बंदरों” को “खोलती” है और पहले अर्क से महीन रोएँ हटाती है।
- पहला डालाव — 1–2 मिनट (75–80 °C)।
- 3–5 बार डालें, हर बार 15–20 सेकंड बढ़ाते हुए।
- चाय की पत्ती के तल का निरीक्षण करें: यदि प्ररोह — साबुत, कोमल, चमकीले हरे, रोएँ सुरक्षित — तो चाय प्रामाणिक और सही ढंग से बनाई गई है। टूटे हुए प्ररोह और झड़े हुए रोएँ अति-सुखाने या नकली होने का संकेत हैं।
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विशेषता: लंबी विल्टिंग (16–18 घंटे) के कारण बाई माओ हौ मानक हरी चायों की तुलना में तापमान के प्रति अधिक “सहनशील” है: 85 °C पर भी यह कड़वा नहीं होता, बल्कि “शहद जैसे” स्वर प्रकट करता है। हालाँकि, अधिकतम “毫香” (रोएँदार सुगंध) के लिए 75–80 °C अधिक उपयुक्त है।
10. भंडारण:
- तापमान: 0–5 °C, वायुरोधी। बाई माओ हौ विशेष रूप से नमी के प्रति संवेदनशील है — चाय पर प्रचुर रोएँ “स्पंज” की तरह काम करते हैं, अधिकांश हरी चायों की तुलना में वायुमंडलीय नमी और बाहरी गंध को तेज़ी से सोख लेते हैं।
- पात्र: वायुरोधी, अपारदर्शी। फ़ॉइल + वैक्यूम पैकेजिंग — आदर्श। खोलने से पहले — कमरे के तापमान पर लाएँ ताकि रोएँ पर संघनन से बचा जा सके।
- प्रकाश: पूर्ण पृथक्करण — रोएँ और क्लोरोफ़िल प्रकाश-संवेदनशील हैं।
- अवधि: 0–5 °C पर 6–8 महीने। वर्तमान तुड़ाई वर्ष में सर्वोत्तम। लंबे समय तक भंडारण अनुशंसित नहीं: बाई माओ हौ ताज़गी और “毫香” के लिए मूल्यवान है, जो समय के साथ उड़ जाते हैं।
11. मूल्य और नकली:
बाई माओ हौ — एक दुर्लभ और महँगी चाय: सीमित क्षेत्र (झेंगहे), हस्तशिल्प, माँग वाला कच्चा माल (झेंगहे दाबाईचा), जटिल तकनीक (16–18 घंटे विल्टिंग + हाथ से “बंदर” का आकार देना)।
- नकली से कैसे बचें:
- आकार — त्रिविमीय, मुड़े हुए “बंदर”, सफ़ेद रोएँ से सघन रूप से ढके। न चपटे, न “सुइयाँ”।
- सुगंध — “毫香 + 清香” (रोएँदार + शुद्ध)। “घास जैसा” या “जला हुआ” स्वर न हो।
- अर्क — “清绿泛黄” (शुद्ध-हरा, पीलेपन की ओर)। धुँधला अर्क अति-सुखाने का संकेत है।
- चाय की पत्ती का तल — साबुत, कोमल प्ररोह, सुरक्षित रोएँ के साथ।
12. रोचक तथ्य:
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वह काउंटी जिसने युग को नाम दिया। झेंगहे — चीन की एकमात्र काउंटी, जिसके सम्मान में सांग सम्राट हुई-ज़ोंग ने पूरे शासनकाल (1111–1118) का नाम रखा: वह स्थानीय सफ़ेद चाय से इतना प्रभावित हुआ कि उसने युग का नाम बदलकर “झेंगहे” (政和) कर दिया। बाई माओ हौ — इस हज़ार वर्षीय परंपरा का उत्तराधिकारी।
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“लाल और हरी के बीच” (介于红茶绿茶之间). अनूठी तकनीक: 16–18 घंटे विल्टिंग (जैसे सफ़ेद चाय) + फ़िक्सेशन और रोलिंग (जैसे हरी चाय)। परिणाम — एक चाय जो औपचारिक रूप से हरी है, लेकिन स्वाद में — सफ़ेद के करीब।
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फ़ान चांगयी (范昌义, 1910). बाई माओ हौ के निर्माता — झेंगहे के चाय व्यापारी, जिन्होंने गुआंगडोंग और हांगकांग के निर्यात बाज़ार के लिए सफ़ेद और हरी चाय की परंपराओं को मिलाया।
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दो बाई माओ हौ। झेंगहे वाला (हरी/सफ़ेद-हरी, झेंगहे दाबाईचा) और आंसी वाला (ऊलोंग, शिज़ू पर्वत से)। आंसी वाला बाई माओ हौ, जिसे किंग के अंत में भाइयों से जिया और से बिंग ने बनाया, “安溪药茶” (“आंसी की औषधीय चाय”) के रूप में प्रसिद्ध हुआ और ताइवान, जापान, दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप को निर्यात किया गया। भाई से बिंग इतना धनी हो गया कि 1878 में, जब शानडोंग में सूखा पड़ा, उसने अनाज का कारवाँ तैयार किया और राजसी सहायता की अपील का उत्तर दिया — जिसके लिए किंग दरबार ने उसे “奉政大夫” (फ़ेंगझेंग दाफ़ू) की उपाधि और “花翎” (मोर पंख) पहनने का अधिकार दिया। वर्तमान में आंसी बाई माओ हौ लगभग विलुप्त है — शिज़ू पर्वत पर केवल 7–8 पुराने पेड़ “碗口粗” (“कटोरे जितने मोटे तने वाले”) बचे हैं।
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“आराम करता बंदर” (毛猴静伏). चाय की पत्तियों का आकार — पहचान चिह्न: त्रिविमीय, मुड़ी हुई, चाँदी जैसे रोएँ से ढकी, वे सचमुच गोले में सिकुड़े छोटे बंदरों की याद दिलाती हैं।
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झेंगहे दाबाईचा — सार्वभौम किस्म। इसी किस्म से बनते हैं: सफ़ेद यिन्झेन, सफ़ेद बाई मुदान, लाल “झेंगहे गोंगफ़ू” (政和工夫红茶), और बाई माओ हौ। एक ही कल्टीवार से चार श्रेणियों की चाय — एक रिकॉर्ड।
13. झेंगहे और फ़ूज्यान की अन्य चायों से तुलना:
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झेंगहे बाईहाओ यिन्झेन (政和白毫银针): इसी किस्म (झेंगहे दाबाईचा) की सफ़ेद चाय। केवल कलियाँ। विल्टिंग और भी लंबी (24–48 घंटे), बिना फ़िक्सेशन के। बाई माओ हौ — फ़िक्सेशन और रोलिंग के साथ, कली + 2–3 पत्तियों से, “हरी” चरित्र।
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आंसी बाई माओ हौ (安溪白毛猴): शिज़ू पर्वत की ऊलोंग चाय। पूर्ण ऊलोंग किण्वन + “窨制”। “आंसी की औषधीय चाय”। लगभग विलुप्त। पूरी तरह भिन्न प्रकार — ऊलोंग, हरी नहीं।
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ताइपिंग हौ कुई (太平猴魁): आनहुई। यह भी “बंदर” चाय, लेकिन चपटी, बड़ी पत्ती वाली, बिना रोएँ की। बाई माओ हौ — मुड़ी हुई, त्रिविमीय, प्रचुर रोएँ के साथ। दोनों हरी हैं, लेकिन विभिन्न प्रांतों और तकनीक से।
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झेंगहे बाई मुदान (政和白牡丹): झेंगहे दाबाईचा की सफ़ेद चाय। कली + 1–2 पत्तियाँ। बिना फ़िक्सेशन के। बाई माओ हौ — फ़िक्सेशन और “बंदर” आकार के साथ। दोनों — “रोएँदार”, लेकिन विभिन्न श्रेणियों की।
निष्कर्षतः:
बाई माओ हौ — हज़ार वर्षीय वंशावली वाली चाय: सांग सम्राट के शासनकाल को नाम देने वाली झेंगहे काउंटी ने 1910 में इस सफ़ेद-हरी “संकर” को जन्म दिया। इसका सूत्र — 16–18 घंटे विल्टिंग + फ़िक्सेशन + “सिकुड़े बंदर” का आकार — एक ऐसी चाय बनाता है जो औपचारिक रूप से हरी है, लेकिन भावना में — “白绿” (“सफ़ेद-हरी”): रोएँदार सुगंध, श्रेणियों “के बीच” कोमल स्वाद, कप में चाँदी जैसे “बंदर”। झेंगहे दाबाईचा की इसी किस्म से चार प्रकार की चाय बनती है — सफ़ेद सुइयों से लेकर लाल “गोंगफ़ू” तक; बाई माओ हौ उनमें से सबसे “संक्रमणकालीन” है, सफ़ेद और हरी के बीच एक सेतु-चाय, जो फ़ूज्यान की प्रयोगशीलता की भावना से जन्मी।